बहुद्देशीय सामाजिक कार्यों से नार्मदीय समाज का नाम रोशन कर रही श्रीमती सरिता साक्कले, मिल चूके है कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

( जितेन्द्र शिवहरे )
◆ गणपती जी की इकोफ्रेण्डली (मिट्टी निर्मित) मुर्तियां नि:शुल्क करती है वितरित
◆ इस बार 151 परिवारों को दी जायेगी गणेश जी की प्रतिमा

इंदौर। श्रीमती सरिता अजय साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश की होकर नार्मदीय ब्राह्मण समाज से हैं। सरिता जी एक सक्रिय समाजसेवीका होकर इंदौर पालिका निगम के पेंशन विभाग में कार्यरत में है। आप कोरोना काल के पुर्व भी महिलाओं को एकत्रित करके सामूहिक गरबा आयोजन आयोजित करना, हरियाली उत्सव मनाना, अनेक तरह के मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित आदि करती आई है। वर्तमान में आप विभिन्न तरह के ऑनलाइन कार्यक्रम करवा रही है। आपके द्वारा नार्मदीय समाज रेवा स्वयंबर गठबंधन के 6 समूह और एक पुनर्विवाह समूह चलाया जाता है। इन समूहों के माध्यम से समाज के 300 से अधिक रिश्तें तय हो चुके हैं। कोरोना काल में डेढ़ साल से प्रतिदिन इन ग्रुपों पर 20 से 25 बायोडाटास, 2 दिन के अंतराल में लडकीयों और लड़कों के डाले जाते हैं। यह सब सरिता जी के द्वारा हो संचालित होता है। इसके अलावा आप महिलाओं का एक मनोरंजन ग्रुप चलाती है। आप साहित्य ग्रुप रेवा नार्मदीय काव्य संगम साहित्य संचालित करती है। इस समूह में समाज की कवयित्रीयां अपनी स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत करती हैं। श्रीमती साक्कले की कई राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके है। फेसबुक पर समरस साहित्य सृजन संस्था अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इसी समूह में समाज की महिलाओं द्वारा 1 जून से 30 जून तक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन प्रतिदिन रात्रि 8:00 से 9:00 तक पूरे माह किया गया। यह बहुत गौरव की बात है। ऐसा नार्मदीय ब्राहमण समाज समाज में पहली बार हुआ। इसके अलावा आप पर्यावरण की सुरक्षा की दृष्टि से बहुत सारी संस्था से जुड़ी हैं।आप संस्था के सदस्यों को हाथ से बनी हुई गणपति जी की मिट्टी की मूर्तियां निशुल्क वितरित करती है। समाज के जो भी लोग लेना चाहते हैं आप उन्हें निशुल्क देती है। यह गणपति जी दीवार मिट्टी के होते हैं और पवित्र नदियों का जल इसमें मिलाया जाता है। मुर्तियां श्रद्धा के साथ हाथ से बनाई जाकर शुद्ध मिट्टी की होती है। सरिता जी कहती है कि 10 दिन की सेवा आराधना के बाद गणपति जी को बाल्टी में घर में ही विसर्जन कर उस मिट्टी को घर के गमलों में रखा जाए या पेड़ में डाल दी जाए ताकि शक्ति रूप में गणपती जी घर में विराजमान रहे। इसमें पर्यावरण की भी सुरक्षा है। इस बार 151 गणपती जी की मूर्ति बनाने का संकल्प लिया है। इन्हें रंग-रौनक से सुसज्जित किया जाकर समाज जनों को वितरीत किया जायेगा।

