हटा लो अंध भक्तों स्याह का निज सोच से पर्दा, करो अब चित्त से चिंतन धरा पर साध्य है नारी…

हरिलाल राजभर, मऊ( हरिलाल राजभर )
हृदय में जागरण नवरात्रि पूरे वर्ष रखता हूँ ।
उपासक प्रेम का प्रेमिल चमन में हर्ष रखता हूँ ।
व्रती इंसानियत का हूँ दिखावे ढोंग से हटकर ।
जलाकर ज्योति मैं सम्मान का उत्कर्ष रखता हूँ ।।
भवानी अंब के ही रूप में प्रत्येक नारी है ।
उमा काली कपाली शक्ति माँ हर एक नारी है ।
हजारों नाम की माला जपूँ क्यों अंध बन करके ?
करूँ मैं वंदना जिस नाम की वह नेक नारी है ।।
नहीं मैं मूर्तियाँ पूजूँ सुलभ आराध्य है नारी ।
महा ये शक्ति है तो चित्र में क्या बाध्य है नारी ?
हटा लो अंध भक्तों स्याह का निज सोच से पर्दा-
करो अब चित्त से चिंतन धरा पर साध्य है नारी ।।
लेखक – हरिलाल राजभर, मऊ जनपद के कुचहरा, बिजपुरा के निवासी हैं।

