रचनाकार

भूमंडल का स्वामी है ये, त्रिभुवन का प्रतिपाल है

( किशोर कुमार धनावत )

आजका आत्म उद्गम
“दुंद दुंदाला – सुंड सुंडाला,
बदन भारी विशाल है।
गौरीशंकर का है लाडला,
कैसी मतवाली चाल है।
भूमंडल का स्वामी है ये,
त्रिभुवन का प्रतिपाल है।

हाथ इसके फरसा सोहे,
भोजन में लड्डू थाल है।”


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किशोर कुमार धनावत,
१०-९-२०२१

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