हम बेवफ़ा हरगिज़ न थे, पर हम वफ़ा कर न सके!
@आनन्द कुमार…
मऊ। “शालीमार” फ़िल्म का यह गाना हम बेवफ़ा हरगिज़ न थे, पर हम वफ़ा कर न सके! इन दिनों मऊ जनपद के घोसी लोकसभा क्षेत्र में खूब चरितार्थ हो रही है। क्योंकि आज़ादी के बाद पहली बार जिस घोसी लोकसभा की सीट पर 2014 में भाजपा ने कमल खिलाकर इतिहास रचा था और 2019 में उससे भी शानदार प्रदर्शन कर वोटों की बढ़त बनाई, सपा-बसपा गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी होने के वावजूद भी भाजपा के प्रत्याशी की हार सम्माजनक हुई। वही भाजपा 2024 में अपनी सीट को सहयोगी दल सुभासपा के मुखिया ओमप्रकाश राजभर को सरेंडर कर दिया।लगे हाथ यूपी सरकार के नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री व सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने वृहस्पतिवार को अपने पुत्र अरविन्द राजभर को घोसी लोकसभा से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस सीट पर गठबंधन धर्म निभाते हुए सुभासपा के लिए छोड़ने को लेकर जनता जनार्दन से लेकर भाजपा जनों के बीच तरह-तरह का चर्चा है। लोगों की बात कहें तो लोग कह रहे हैं भाजपा का इतना मज़बूत सीट सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के लिए छोड़ने के पीछे भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा समझ में नहीं आ रहा है कि आख़िर भाजपा ने ऐसा क्यों किया? आख़िर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि भाजपा को ओपी राजभर के आगे घुटने टेकने पड़े!
कुछ माह पहले भाजपा ने जिस ओपी राजभर के सहारे विधानसभा के घोसी उपचुनाव के समर में वैतरणी पार न कर सकी, उसी ओपी राजभर की झोली में घोसी लोकसभा की सीट को डालकर आख़िर क्या संदेश देना चाहती है! और कैसे इस सीट पर विजय पाना चाहती है यह लोगों के समझ के परे है। लेकिन भाजपा के दिग्गज भी कुछ न कुछ सोच समझकर यह निर्णय लिए ही होंगे!
भाजपा ने भले ही इस सीट को सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर को देकर गठबंधन धर्म का पालन किया है, लेकिन इस सीट पर सम्भावित भाजपा प्रत्याशियों को जो गहरी चोट लगी है कार्यकर्ताओं को जो दु:ख पंहुचा है वह दिख तो नहीं रहा है लेकिन इसकी टीस कुछ ज़्यादा ही है और तो और जनता जनार्दन चुनावी सिम्बल कमल और छड़ी का जो अंतर महसूस कर रही है अगर उसे मतदान तक व्यक्त कर दी तो भाजपा व सुभासपा दोनों को लेने के देने पड़ जाएँगे! और बाज़ी कोई और मार सकता है! भाजपा व सुभासपा के गठबंधन के बाद घोसी सीट पर अरविन्द राजभर के प्रत्याशी घोषित होने के बाद इस सीट पर सपा और बसपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ स्थानीय नेताओं की पैनी नज़र है । इसके साथ ही सुहलदेव स्वाभिमान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र राजभर की भी परीक्षा होनी है और उन्हें भी घोसी की सियासत में इस परीक्षा से गुजरना होगा घोसी की सियासत में कौन बड़ा मैं या फिर, ओमप्रकाश राजभर!



