रचनाकार

मैंने उससे प्यार किया और उसने मुझे वेश्या बना दिया…

@ आकाश धुसिया…

मैं लड़की थी गांव की।
हंसती थी, खेलती थी,
घर का सारा काम, मैं करती थी।
एक लड़का आया मेरे गांव में,
उस दिन कांटा लगा था मेरे पांव में,
उसने मेरे ज़ख्म पर मरहम लगाया,
तब मैंने सोचा था,
बनाऊंगी मैं इसको अपना पिया,
मैंने तो उससे प्यार किया,
और उसने मुझे धोखा दिया!
उसको मैं चाहने लगी थी,
उसके लिए जागने लगी थी,
सपने में भी आने लगा,
हर वक्त मुझको भाने लगा।
हर किसी को मैं उसकी बात बताने लगी।
मैंने उससे अपने प्यार का इजहार किया।
उसने भी मुझे नहीं इंकार किया।
फिर मैने हिम्मत करके अपने घर पर,
उससे शादी करने के लिए बात चलाई, मेरे घरवाले मुझे डांटने लगे,
समाज का ऊंच नीच समझाने लगे,
परिजन बोले ये सब काम करने से पहले,
तुझे शर्म नही आई।
लेकिन मैं तो प्यार में डूबी थी,
मां-बाप की हर बात लग रही थी, पराई,
घर की इज्जत को भूल,
मैंने उस लड़के से भागकर शादी रचाई,
मैंने उस पर खुद से और अपने घरवालों से,
ज्यादा भरोसा किया।
और उसने मुझे कोठे पर लेजाकर बेच दिया।
मैंने उससे प्यार किया ।
और उसने मुझे वेश्या बना दिया।
मैने उसको अपनी जान से ज्यादा चाहा।
और उसने मुझे वेश्या बना दिया।
मेरे प्यार और अरमान का गला घोंट,
अपना असली रूप दिखा दिया।
बिक रही हू आज इस बाजार में,
कभी पांच सौ में और कभी हजार में
सोचती हूं, इस दलदल से निकलकर,
भाग जाऊं, फिर ख्याल आता है, भागकर कहा जाऊंगी!
जिनकी इज्जत को मैं तार-तार कर,
सरेआम नीलाम कर दी, उनके यहां जाऊ।
या फिर उसके यहां जाऊं ।
जिसने मुझे पैसे के लिए बेच दिया।
मैने उससे प्यार किया,
और उसने मुझे वेश्या बना दिया।
फंस चुकी हूं इस दलदल में,
मरती हूं यहां पल-पल मैं,
ये सजा मिली है मुझे, मैं ही गुनहगार हूं,
अपने घरवालों का दिल दु:खाने का,
मैं असली किरदार हूं।
तब ही तो मैं वेश्या बनी हूं, इस लालबत्ती की,
यहां आने वाला हर शख्स,
ना ही मेरा जज्बात समझता है,
और ना ही हमारे हालात समझता है,
वो तो बस एक ही बात समझता है,
तन को अपनी भूख,
मुझे अपना आहार समझता है।
कभी कभी सोचती हूं ,
उसने मेरे साथ ऐसा क्यूं किया ।
मैने उससे प्यार किया।
और उसने मुझे वेश्या बनाकर बेच दिया।
मुझे तब पता नही था, की एक दिन यही लड़का मुझे ऐसा जख्म देगा,
जिसका मरहम भी नहीं मिलेगा।
जो कल मेरा हमदर्द बन रहा था,
आज मुझे सबसे ज्यादा दर्द देगा।

One thought on “मैंने उससे प्यार किया और उसने मुझे वेश्या बना दिया…

  • राजेश सिंह

    संदेशपरक

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