सिद्धेश्वर की एक कविता : फादर्स डे पर अपने पिता को स्मरण करते हुए
कविता…
पिता का उपहार
———————– 0 सिद्धेश्वर ———–
📀 बेटे ने दिया
पिता जी को उपहार
उनके जन्मदिन पर.
चंद रुपये- पैसे !
जानना चाहता था/ वह
पिताजी चंद सिक्कों से
अपने सपनों को
खरीद सकते हैं कैसे ?
शाम ढलते-ढलते
मंदिर की
घंटियों के साथ-साथ
प्रार्थना में
जुड़ती गईं थीं
उनकी दो हथेलियां…. !
मन ही मन
मांगी थी /उन्होंने
ईश्वर से दुआएं
बेटे और पत्नी के
स्वस्थ रहने की….!!
अपने लिए मिले
उपहार के पैसों से
खरीद लाए थे
अपनी पत्नी की खुशियां !
अपने बेटे की मां के लिए उपहार..!
जिस उपहार में
छुपा हुआ था/ उनकी
खुशियों का संसार….!!!
( ‘ सिद्धेश सदन “( किड्स कार्मेल स्कूल), द्वारिका पुरी रोड नंबर 2, पोस्ट :बीएचसी, हनुमान नगर, कंकड़बाग, पटना 800026 (बिहार )मोबाइल 923 4760365

