खास-मेहमान

कोविड19! निजी नफे नुकसान को कुछ वक्त के लिए दरकिनार कर मिलजुल कर लोगों को जागरूक करने की जरूरत

( अजित राज )

माना कि कोरोना वायरस एक महामारी है। पर यह उन महामारियों जैसा नहीं है जिसे भारत के लोगों ने अब तक देखा सुना है। यह किसी उपाय से नहीं कमजोर पड़ने वाला है। यह तो अपने अंदर आंतरिक बदलाव लाकर ही इससे पार पाया जा सकेगा।
आप खुद विचार करिए जो अस्पताल पहुंचे उसमें से ज्यादेतर लोग काल कवलित हो गये जो घर पर रहकर घरेलू इलाज किये उसमें से ज्यादेतर जंग जीत गये। ऐसा क्यों हुआ ? इस वजह को समझने की जरूरत है।

सरकार में बैठकर सरकारी सुख सुविधा का उपभोग करने,आनंद लेने वालों को यह चाहिए कि सरकार अस्पताल और बेड का विस्तार कर रही है सो करें पर उससे भी आवश्यक है कि वह एक विशेष प्लानिंग के तहत ऐसा वातावरण तैयार करने का भी प्रयास करें जिससे लोग बाग अपने में सुधार बदलाव लाने के प्रति प्रेरित हो सकें, आकर्षित और उत्साहित हो सकें।

यह समय महापरिवर्तन की भूमिका तैयार करने वाला है। 2021 से 2025 के बीच महापरिवर्तन होना ही होना है। कोरोना वायरस भी उसी के तहत प्रकट हुआ है। कोरोना से निजात पाने का एक ही सटीक उपाय है कि हम अपने जीवन शैली में बदलाव लाकर अपने जीने के तरीके को मौलिक बनाये। जो अंदर हैं यही बाहर से भी नजर आएं

प्रकृति हम सब को पुनः एक मौका दे रही है, इसके पहले सितंबर अक्टूबर में भी मौका दिया था। हमने उसका मजाक उड़ाया नतीजा सामने है।
यदि हम सब ने इस मौके को भी गंवाया तो इसके बाद अनेको अनेक लोग नये नतीजे को देखने और अपनी अगली पीढ़ी को बताने के लायक भी बचेंगे यह कह पाना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल होगा।
आइये हम सब लोग अपने निजी नफे नुकसान को कुछ वक्त के लिए दरकिनार कर मिलजुल कर लोगों को जागरूक करने, उत्साहित करने का एक सबल अभियान चलायें। सब को यह जनाये बतायें कि आने वाले समय का आनंद लेने के लिए अब हमें कैसे जीना होगा ? कैसे खाना पीना और रहना होगा ?

लेखक-अजितराज लिखते हैं जिन लोगों को भी सोशल मीडिया, वाट्सएप, फेसबुक पर साझा किया जाने वाला अपना विचार (लेख) न जमें, अटपटा लगे वह पलट कर निःसकोच उसकी आलोचना जरूर करें। हम ऐसा करने वाले स्वजन के आभारी रहेंगे।

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