पुण्य स्मरण

सियासत की भीड़ में एक अलग शख्सियत थे चंद्रशेखर : रविशंकर सिंह पप्पू


बलिया। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जननायक चंद्रशेखर जी की आज 13 वीं पुण्यतिथि पर लाक डाउन की वज़ह से सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए देवस्थली मे परम पूज्य राष्ट्रनायक चंद्रशेखर जी की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए सदस्य विधान परिषद् रविशंकर सिंह ने भावुक होते हुये कहा कि कुछ लोग बेहद खास होते हुये भी बेहद आम नजर आते हैं । भारतीय राजनीति में ऐसा ही एक शख्सियत थे चंद्रशेखर , जो लोगों को एकदम अपनी सी नजर आती थी । बिना कंघी के बाल ,हल्की दाढ़ी से घिरा चेहरा , भविष्य में झाँकती आँखे , जिस्म पर धोती कुर्ता ,पाँव में चप्पल कुल मिला कर खालिस हिन्दुस्तानी और ठेठ पुरबियाअंदाज । उनकी यही खासियत उनका लोगों से सीधा और गहरा जुड़ाव बनाती रही । आडम्बर और दिखावे से कोसों दूर । देसी ठसक के साथ सीधी सपाट बातचीत। चाहे नाराजगी हो या खुशी हमेशा सामने से जाहिर की । मसला राजनीतिक हो या सामाजिक ,दो बातों का हमेशा ख्याल रखा एक उसूल और दूसरा मानवीय संवेदना । रिश्तों को जीने में उनका कोई जवाब नहीं था , जिसका हाथ थामा कभी छोड़ा नहीं ।लम्बे सियासी सफर में कई साथ आये तो कई ने साथ छोड़ा भी पर उनकी तरफ से कोई गिला नहीं ,कोई शिकवा नहीं , जब मिले वही अंदाज, सामने वाला खुद ब खुद सिमट जाता ।
ऐसे थे चंद्रशेखर जिनकी शख्सियत से अपनी माटी अपना देश की खुशबू का अहसास होता था ।सियासत के शिखर पर होने के बावजूद अपनी जड़ों से गहराई तक जुड़ी ऐसी शख्सियत अब कहाँ ।अब तो बन्द आँखों से भी झूठ की मण्डी में सियासत की नीलामी नजर आती है।इतिहास की समझ और राष्ट्रीय धरोहरों से ऊर्जा ग्रहण करने की जो तीक्ष्ण दृष्टि चंद्रशेखर जी में थी वह किसी दूसरे सामयिक नेता नही।1984 में चुनाव हारने के बाद कई प्रस्तावों के बावजूद वह कहीं दूसरी जगह से चुनाव नही लङे, न पिछले दरवाजे से संसद में पहुचें 1985, से 1990 के बीच सक्रिय राजनीति के अलावा चंद्रशेखर जी ने जो सृजनात्मक कार्य किये हैं, वे उनके संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति के ही परिणाम है। कि सिताबदियारा में जे पी स्मारक, करौधी में राममनोहर लोहिया स्मारक, चंपारण, भीतहरवा में गाँधी आश्रम का जीर्णोद्धार, आचार्य नरेंद्र देव के नाम पर स्मृति-समारोह, लोगों से एक-एक रूपया लेकर कमर भर पानी-कीचड़ पार करतें हुए, खुद ही ईट उठाते हुए, सफाई करते हुए, आधी रात तक काम करते हुए, उन पावन स्मृतियों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का ऋण और शारीरक श्रम का यह पहलू मौजूदा राजनेताओं में शायद अकेले चंद्रशेखर जी के हिस्से पङा है।…….

चंद्रशेखर जी के व्यक्तित्व मे ग्रामीण साहस, औदार्य, सरलता और आत्मविश्वास का समन्वय था। मस्तिष्क और ह्रदय का उनका समृद्ध समन्वय उनकी जेल डायरी में निखरा है। आप की13वी पुण्यतिथि पर शत शत नमन्। इस अवसर पर मुख्य रूप से उत्कर्ष सिंह, सूर्य बली सिंह, अमित सिंह बघेल, विनोद सिंह आदि रहे ।

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