बेंच रहे जो सपनों को, हैं सौदागर
० उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी में हुई काव्य वर्षा
मऊ।उत्तर प्रदेश साहित्य सभा जनपद -मऊ इकाई द्वारा गुरुवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता डा० कमलेश राय एवं संचालन संस्था के संयोजक अशोक कुमार ‘ अश्क चिरैयाकोटी ‘ ने किया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर समस्त रचनाकारों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई। तत्पश्चात गोष्ठी का शुभारंभ विशाल पाण्डेय की सरस्वती वंदना – वर दे वीणावादिनि वर दे,प्रिय स्वतंत्र रव अमृत नव रस भर दे।। से हुआ। उसके बाद युवा कवि बृजेश गिरी ने – दिलों में जलन की आग है तो तपन का क्या होगा , कहीं ना लगे किसी का मन तो ऐसे मन का क्या होगा। सुनाकर समां बांध दिया। गजलकार हरिलाल ‘ कृषक ‘ ने – तुगलकी फरमान करता खोखला इस देश को,बिन विचारे रोज मिलता फैसला इस देश को।। सुनाकर लोगों को सोचने के लिए विवश कर दिया। उसके बाद डा० सूर्यभूषण द्विवेदी ने सुनाया – बाती की सुगंध बता रही है दिया अभी – अभी बुझा है, जरा बादल की लाली देखो सूरज अभी-अभी ढला है।। युवा कवि सुमित उपाध्याय ने सुनाया कि – मुझे सुंदर लगते हैं वो लोग, जिनके पास होता है अतीत का पुल। कवि मृत्युंजय तिवारी ने आतंकवाद पर प्रहार करते हुए सुनाया कि – दिन दहाड़े लूट, हत्या,रहजनी है।हर तरफ आतंक,भय, सनसनी है।। वहीं कृष्णदेव ‘ घायल ‘ ने भोजपुरी भाषा में सुनाया – दरद बेबसी के कहल जाई कइसे,कहिके कहाँ फिर रहल जाई कइसे।। मनोज कुमार सिंह ने सावन को पुकारते हुए सुनाया कि आ जाओ मनभावन सावन वसुंधरा के सोलह श्रृंगार।
कवि ऋषिकेश सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में सुनाया कि- मैं बह गया हूँ, लोग कहते हैं,सब कुछ गंवा कर भी,अपयश कमाकर भी उन सबसे अच्छा हूँ,दिल से सच्चा हूँ,कम लोग कहते हैं।।नवगीतकार सुरेन्द्र कुमार सिंह ‘ चांस ‘ ने – दो कदम चला तो यार मिल गया,चाँदनी हँसी कि फूल गया। सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।वहीं अश्क चिरैयाकोटी ने सामाजिक परिवेश के वर्तमान हालात पर करारा प्रहार करते हुए सुनाया कि – बेंच रहे जो सपनों को, हैं सौदागर देख लिया।। उनका वो बड़बोलापन,हद से बढ़कर देख लिया।। उसके बाद वरिष्ठ दोहाकार रमेश राय ‘ निर्भय ‘ दोहा और कुंडलियां तथा उमेश मिश्र ने कविता सुनाकर खूब वाहवाही लूटे।अंत में डॉ कमलेश राय ने सामाजिक ताने-बाने को रेखांकित करते हुए – अंखियन में लेके लोग अब, सपना नया – नया, घर में बनावें घर नया अंगना नया – नया।। सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। साथ ही उन्होंने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

