एक नजर बेजुबानों पर भी डालिये जनाब
अखबार का कोना:जनसंदेश
(बृजराज)

मऊ। इंसान को यदि कोई दिक्कत होती है तो उसकी सुध लेने वाले बहुतेरे मिल जाते है, लेकिन यदि बेजुबानो पर कोई परेशानी आती है तो उसका ईश्वर ही सहारा होता है। प्रदेश की एक महत्वाकांक्षी योजना थी कि जिले में कोई भी आवारा पशु सड़को तथा गांवो में न दिखे उसके लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में उनके लिए आश्रय की व्यवस्था की गई थी। उसके तहत जिले के विभिन्न इलाकों में बने पशु आश्रय स्थलों पर रखे गए छुट्टा पशुओं के लिए चारा, पानी आदि के लिए विभाग की तरफ से बेहतर प्रबंध नहीं किया जा सका है। अधिकांश स्थानों पर पशुओं को चारे मेें केवल भूसा ही दिया जा रहा है। विभागीय अभिलेखों में पशु आश्रय स्थलों में मात्र 1610 आवारा पशु हैं। 
जिले में छुट्टा पशुओं के लिए 23 अस्थायी पशु आश्रय खोले गए हैं। विभागीय अभिलेखों में आवारा पशुओं की संख्या 1610 दिखाई गई है। लेकिन कई पशु आश्रय स्थल ऐसे है जिसे सिर्फ खानापूर्ति करके चलाया जा रहा है ।पशु आश्रय स्थलों पर पशुओं की देखरेख करने के लिए शिफ्टवार कर्मचारियों की तैनाती तो की गई है, लेकिन विभागीय मानीटरिंग न होने से कर्मचारियों की अनियमित दिनचर्या के चलते छुट्टा पशुओं के खिलाने का काम जैसे तैसे चल रहा है। पशुओं को चारे के रुप में केवल भूसा डाल दिया जा रहा है। भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है। जिले के 23 छुट्टा पशु आश्रयों का कमोबेश यही हाल है । अभी हाल ही में मझवारा स्थित पशु आश्रय में कई पशुओ की चारा की कमी के चलते मौत हुई थी और कुत्ते मरे हुए पशुओ को आश्रय स्थल में ही नोच रहे थे। ऐसे में सवाल यही खड़ा होता है कि इनका जिम्मेदार कौन होगा। आधिकारिक फाइलों में जिले में छुट्टा पशुओं की संख्या न के बराबर है लेकिन गाँवो और शहरों में छुट्टा पशुओ की भरमार है। किसान परेशान है परदहां ब्लॉक के बहरिपुर के किसान वीरभद्र सिंह का कहना है कि छुट्टा पशुओं की संख्या में कोई कमी नही है मुझे पिछले 2 सालों से खेती में बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। बाहर यदि छुट्टा पशु रहे तो किसान परेशान और यदि आश्रय स्थल में रहे तो बेजुबान की सुधि लेने वाला कोई नही है।

