वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया में नाम दर्ज करा, कलाकार बेटियों ने बढ़ाया आज़मगढ़ का मान
मन में कुछ अलग करने का जुनून हो और जुनून इस कदर हो की वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने पर मन आमादा हो तो, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और इस कहावत को चरितार्थ होने से कोई नहीं रोक सकता। अपने मन के जुनूनी आभामंडल को कला और रंग के माध्यम से विश्व रिकॉर्ड बनाने में आजमगढ़ जनपद की बेटियों ने जो इतिहास रचा है वह इतिहास वर्तमान से लेकर आने वाले कल में याद किए जाएंगे। इन कलाकार बेटियों के बारे में दो शब्द यही कहना है कि,
तुम उड़ती रहो हौसलों की उड़ान में, सपनों को पंख लगा कर,
इरादा मजबूत है तो इतिहास बनने से कोई रोक नहीं सकता।
तमसा की रवानी भले ही थोड़ी मद्धिम-मद्धिम हो गई है,
आजमगढ़ की कहानी कभी इतिहास के पन्ने मेंं कम नहीं होगा।
कोरोना योद्धाओं के सम्मान व जन-जागरूकता के लिए फाइन आर्ट सेंटर के कलाकारों ने 1200 वर्ग फीट की रंगोली चिल्ड्रेन स्कूल के हॉल में 30 जुलाई 2020 को बनाई थी। लार्जेस्ट रंगोली टू सैल्यूट कोरोना वारियर्स विषय पर बनी रंगोली ने सभी मानक पूर्ण कर वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में अपना नाम दर्ज करा आजमगढ़ का नाम रोशन किया। कोरोना काल में कला जगत में जितनी भी कलात्मक गतिविधियां हुई उन सब में कोरोना योद्धाओं के सम्मान में यह सबसे बड़ी रंगोली होने के कारण एक नये विश्व रिकॉर्ड के रूप में भी स्थापित हुईं। बड़ा गणेश मंदिर के प्रांगण मे मंदिर के महंत राजेश मिश्रा व नारी शक्ति संस्थान की सचिव डॉ पूनम तिवारी के हाथों सभी विजेताओं को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया की तरफ से आए मैडल व प्रमाणपत्र वितरित किए । महंत जी ने सभी प्रतिभागियों को आशीर्वचन देते हुए कहा ये पूरे आजमगढ़ के लिए गौरव की बात है।डॉ पूनम ने कहा इन कलाकार नारी शक्तियों द्वारा हासिल यह उपलब्धि समाज मे अन्य सभी के लिए प्रेरणापरक होगी। फाइन आर्ट सेंटर की निदेशक डॉ लीना मिश्रा ने इस उपलब्धि का श्रेय ईश्वर की कृपा, माता पिता का आशीर्वाद व सभी की शुभकामनाओं को दिया और कहा कोरोना के संकट काल मे बेहद विषम परिस्थितियों में हासिल हुई यह उपलब्धि हम सबके लिए ख़ास है।हमे इस कार्य को पूरा करने के लिए कई लक्ष्य एक साथ तय करने थे। तय समय सीमा में निर्धारित क्षेत्रफल में रंगोली से कलाकृति उकेरनी थी। दस घण्टे तक मास्क लगाकर रंगोली बनाना कठिन था। मेरे साथ कलाकार जया गौर,अंकिता श्रीवास्तव, दीपिका सिंह, स्वाति बरनवाल, ऋषिका अग्रवाल, सौम्या अस्थाना, वर्तिका कृष्णा, स्वाति राय, इशिका स्वरूप व सबसे कम उम्र की कलाकार सहजप्रीत कौर ने पूरी मेहनत व लगन से इसे अंजाम दिया। नौ घण्टे पैंतालीस मिनट में ही यह लक्ष्य पूरा कर समाज मे यह संदेश प्रेषित किया कि कोरोना से बचाव के ज़रूरी नियमों का पालन कर आप अपने सभी काम कर सकते हैं। हमारी टीम ने यह रिकॉर्ड बना समाज को यह संदेश भी दिया कि दुनिया मे कोई ऐसा काम नही जो बेटियां न कर सकें।रंगोली कला में पेंटिंग से कही ज़्यादा शारीरिक श्रम लगता है फिर भी इसे रंगोली से बनाने के पीछे भी मेरा एक उद्देश्य था में इस कला के माध्यम से यह बताना चाहती थी कि इतनी मेहनत के बाद भी रंगोली को मिट ही जाना है फिर भी यह सुंदर मनमोहक बने यह कलाकार की कोशिश रहती है ऐसे ही हमारा जीवन है ।हमे पता है यह एक दिन खत्म ही होना है फिर भी उसे कलात्मक व श्रेष्ठ बनाने की हमेशा कोशिश करते रहना चाहिए।कार्यक्रम का संचालन डॉ कौशलेंद्र मिश्र ने किया।



