पुण्य स्मरण

कुछ अलग : डा. देवभूषण पाण्डेय की चौथी पुण्यतिथि पर लोक कल्याण सेवा न्यास ने लगाया 101 पौधा

मऊ। लोक कल्याण सेवा न्यास द्वारा पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये चलायें जा रहे अभियान के अन्तर्गत आज डीसीएसकेपीजी कालेज के हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रो० डॉ०सर्वेश पाण्डेय के पुज्य पिता स्वः डॉ० देवभूषण पाण्डेय पूर्व प्राचार्य मर्यादा पुरषोत्तम महाविद्यालय रतनपुरा मऊ के चौथी पुण्य तिथि पर उनके पावन स्मृति में कासिमपुर मऊ मे 101 पौधा लगा कर उन्हे श्रद्धांजली अर्पित किया गया ।
श्रद्धांजली सभा को सम्बोधित करते डीएवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक व डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ० सर्वेश पाण्डेय ने कहा की
वैश्विक महामारी 2020 प्रकृति के साथ हमारे सह-अस्तित्व एवं साहचर्य की ओर ध्यानाकर्षण का एक विशेष अवसर है। प्रारंभ से ही, मानव जाति स्थानीय से वैश्विक स्तर तक-प्रकृति के साथ सम्यक संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रही है। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को लेकर मनुष्य के बढ़ते लालच का परिणाम संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए विनाशकारी साबित हुआ है। पर्यावरणीय प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरे बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं और मनुष्य इस बात के लिए विवश हुआ है कि वह तथ्य को अधिक व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना सीखे ताकि हम भविष्योन्मुखी और समग्र दृष्टिकोण को अपना सकें और भावी पीढिय़ों के लिए बेहतर पर्यावरण छोड़ सकें। पृथ्वी पर सभी जीवधारियों का जीवन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वर्ष को ‘जैव विविधता’ को समॢपत किया जाना इस सह-अस्तित्व को और बल प्रदान करता है। सहिष्णुता सिखाने और मनुष्य के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने का प्रकृति का अपना विशिष्ट तरीका है और इस संबंध को फिर से आत्मसात करने का यह उपयुक्त अवसर है।
जहां तक पर्यावरण संरक्षण की बात है, भारत सांस्कृतिक मूल्यों और धार्मिक लोकाचार की समृद्ध परम्परा वाला देश रहा है। वेदों और प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पृथ्वी को माता का दर्जा दिया गया है। अथर्ववेद में कहा गया है ‘माता भूमि:, पुत्रो अहंम् प्रथिव्या:‘ अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूं। यहां प्रकृति के पंच तत्वों अर्थात जल, अग्नि, आकाश, पृथ्वी और वायु की पूजा पीढिय़ों से होती रही है। देश भर में पेड़-पौधे, पहाड़, नदियों और फसलों की पूजा की विभिन्न धार्मिक मान्यताएं रही हैं। गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, तुलसी, आक, वटवृक्ष पूजा, बैसाखी, गोदावरी पुष्करम, बिहू, राजापर्बा, मकर संक्रांति या पोंगल जैसे त्यौहारों की जड़ें प्रकृति से जुड़ी हैं और ये प्रकृति संरक्षण और सम्मान का शाश्वत संदेश देते हैं।
भारत विश्व का एकमात्र देश है, जिसे ईश्वर ने 6 विभिन्न ऋतुओं से सुशोभित किया है यथा: ग्रीष्म, शरद, वर्षा, हेमंत, शिशिर और बसंत। ये 6 ऋतुएं हमें प्रकृति के अनुसार जीवन व्यतीत करने की शिक्षा भी प्रदान करती हैं। लगभग एक सदी पहले महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बसु ने ही यह सिद्ध किया था कि पेड़-पौधों, वनस्पति में भी जीवन होता है, ये भी हमारी तरह ही लगाव एवं दर्द महसूस करते हैं। यहां बिश्नोई समाज का जिक्र करना प्रासंगिक प्रतीत होता है, जिसने हमेशा से ही प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का शाश्वत संदेश दिया है।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान हरिशंकर यादव, डॉ० प्रशान्त पाण्डेय, मृत्युन्जय द्विवेदी, रविश तिवारी, विशाल पाण्डेय, आनन्द प्रताप सिंह, मोहन पाण्डेय, दीपू चौरसिया, नकुल यादव, राजन, वैदिक, प्रबल प्रताप सिंह सहित गॉव के दर्जनों गणमान्य लोग रहे ।

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