खास-मेहमान

मैं शराबी ना होता

मेरी कलम से…
अखिलानन्द यादव

अगर मुझको पीने की आदत ना होती….
बुरे साथियों की चाहत ना होती….

सुबह – शाम संगत की, रंगत में फंसकर।
दूर हो रहा हूं, अपनों से हंसकर।।

अगर जाम से मेरी इबादत ना होती….
बुरे साथियों की आदत ना होती….

पीने – पिलाने में, समय कट रहा हैै ।
क्या गमो का ये बादल, कहीं छट रहा है ?

अगर पास मेरे दौलत ना होती….
बुरे साथियों की चाहत ना होती…..

#अखिल दोस्तो संग, शराबी ना होता।
बुरा वक्त मेरा, जरा भी ना होता।।

#आनंद से मेरी नफरत ना होती….
तो बुरे साथियों की चाहत ना होती..

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