मूक बधिरता कैंप में 32 बच्चे की जांच, प्रति बच्चे लगभग 08 लाख रु. खर्चा, सरकार कर रही वहन
■ 2020-21 में जिले के ब्लाकों से 15 मूक-बधिर बच्चों को मिला निःशुल्क लाभ
मऊ। जन्मजात मूक-बधिर (जन्म से ही बोलने और सुनने में अक्षम) की समय पर पहचान और तुरंत कॉकलियर इम्प्लांट सजर्री ही गूंगे व बहरेपन का सही समय पर सही इलाज है। इसी उद्देश्य से आरबीएसके के सहयोग से सदर अस्पताल मऊ में गत दिनों परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें शासन से सर्जरी के लिए चयनित कानपुर के डॉ एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी (कान, नाक एवं गला) फाउंडेशन द्वारा जनपद के विभिन्न ब्लाकों से आये जन्म से पाँच साल के मूक-बधिर बच्चों का परीक्षण किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि शिविर में आये 32 मूक बधिर बच्चों का परीक्षण किया गया। जिसमें 24 बच्चों को आपरेशन के लिए चिन्हित कर लिया गया, प्रत्येक बच्चे पर आठ लाख रुपये के हिसाब से निःशुल्क सर्जरी, मशीन और चिकित्सा प्रशिक्षण खर्च आएगा जो सरकार वहन करेगी। डब्लूएचओ के अनुसार प्रति एक हजार नवजात बच्चों में औसतन छः बच्चा जन्मजात मूक-बधिरपन का शिकार होता है, यदि उसका सही समय पर सही इलाज नहीं होता तो वह गूंगेपन का शिकार हो जाता हैं। परंतु ज्यादातर बच्चों में इस बीमारी की पहचान नहीं हो पाती या फिर ज्यादातर के बारे में देरी के साथ पता चलता है। इसलिए बच्चे के पैदा होने के बाद उसके स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से लगातार जांच करवाते रहना चाहिए ताकि ऐसी बीमारी होने की सूरत में बच्चे का बिना देरी किये इलाज हो सके।
उन्होंने बताया कि यदि छः माह के अंदर ऐसे मूक-बधिर बच्चे की कॉकलियर इमप्लांट सजर्री हो जाए, तो बेहद शानदार नतीजे आते है। देरी की सूरत में पीड़ित बच्चे के दिमाग के बोलने वाले हिस्से पर 6 साल की उम्र उपरांत सिर्फ देखकर समझने वाला दिमागी विकास होता है। इसलिए जितने कम उम्र में कॉकलियर इमप्लांट सजर्री होगी, नतीजे उतने ही परिणाम सकारात्मक होंगे। पिछले वित्तीय वर्ष में इस शिविर के माध्यम से 2020-21 में जिले के विभिन्न ब्लाकों से 15 मूक-बधिर बच्चों को सरकार से निःशुल्क लाभ प्राप्त हुआ है। अब वह सभी बच्चे समाज से अपने आप को जुड़ा महसूस कर रहे है। इन सभी बच्चो को भी कैंप में अपना अनुभव साझा करने हेतु बुलाए गए है। सभी परिजन बहुत ही संतुष्ट एवम खुशी जाहिर किए।

डॉ एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर श्री नागेन्द्र मिश्र ने बताया कि कॉकलियर एक बेहद संवेदनशील यंत्र (डिवाइस) होता है, जिसको आप्रेशन(सजर्री) द्वारा लगाया जाता है। यह प्रक्रिया करीब 2 घंटों के आप्रेशन के साथ पूरी हो जाती है और मरीज को 2-3 दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। आप्रेशन की सफलता डाक्टर, अस्पताल की सुविधाओं तथा इमप्लांट करने की सर्जिकल तकनीक पर ज्यादा निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 550 से अधिक बच्चों की सफल कॉकलियर इम्प्लांट सजर्री की जा चुकी है।
डॉ एस एन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी (कान, नाक एवं गला) फाउंडेशन के ईएनटी डॉ एस एन मेहरोत्रा का कहना है कि जन्म से ही बोलने और सुनने में अक्षम (मूक-बधिर) बच्चों के इलाज को लेकर सरकार गंभीर है। उनकी इस कमी को स्थाई तौर पर दूर करने के लिए कॉकलियर इंप्लांट के माध्यम से सर्जरी कराई जाती है।
रतनपुरा ब्लॉक के रहने के वाले ज्योति 3 वर्षीय की पिता अमर चौहान बताते हैं कि जब ज्योति पैदा हुई तो सब खुश थे लेकिन जब पता चला कि यह बोल सुन नहीं सकती है यह बात हम सभी के लिये चिंताजनक था समाचार पत्र के माध्यम से पता चला की शिविर लगा है। तो एक आस जगी और अपने बच्चे को उम्मीद के साथ आरबीएसके टीम के माध्यम से दिखाने चले आये। डॉक्टर को कानपुर से बुलाया गया है आशा है कि अब मेरा बच्चा बोल सकेगा।

बडराव ब्लॉक के तान्या पिता उदयभान यादव ने बताया कि जब तान्या (1वर्ष) का था, तब पता लगा मेरी बच्ची बोल सुन नहीं सकती तब हम परेशान हो गए और कई जगह दिखाया पर सही इलाज नहीं मिला, तो भगवान के भरोसे छोड़ दिया था जो होगा देखा जायेगा। आरबीएसके टीम आगनवाड़ी केन्द्र पर आयी तब शिविर के बारे में बताया तो आज हम अपने बच्ची को इस उम्मीद के साथ दिखाने आये कि अब मेरी बच्ची सुन और बोल सकेगी।
डी ई आई सी मैनेजर श्री अरविंद वर्मा ने बताया कि पूर्व में जिस आर बी एस के टीम के बच्चो का ककलियर इंप्लांट हुआ है उन सभी कुल 8 टीम लीडर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस शिविर के दौरान दौरान जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ ब्रिज कुमार, डी सी पी एम श्री संतोष सिंह, डी ई आई सी मैनेजर श्री अरविंद वर्मा, जिला ऑडियोलॉजिस्ट डा देवराज, ऑडियोलॉजिस्ट असिस्टेंट संत कुमार, हेल्प डेस्क मैनेजर श्री राम प्रवेश यादव , दिव्यांग जन विभाग से जिला सशक्तिकरण अधिकारी, डॉ एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी (कान, नाक एवं गला) फाउंडेशन से नागेन्द्र मिश्र परियोजना अधिकारी, समस्त ब्लॉक के आरबीएसके टीम के सदस्य आदि लोग उपस्थित रहे।


