दिल के बस जज़्बात बहे, बुरा क्या है
( बृजेश )
कोई अपनी बात कहे, बुरा क्या है,
वो किसी के साथ रहे, बुरा क्या है ।
लोगों की नजरों में वो नाकाम शख्स है,
फ़कीरों से हालात रहे, बुरा क्या है ।
जब भी जी किया सफ़र पे निकल गया,
दिन रहे या रात रहे, बुरा क्या है ।
आवारों सी है जिन्दगी,कोई फिक्र भी नहीं,
कुछ भी न औकात रहे,बुरा क्या है ।
टूटने के डर से वो कभी नहीं रोया,
दिल के बस जज़्बात बहे, बुरा क्या है ।

