क्लब फूट (टेढ़े पंजों) के इलाज प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण मिरेकल फीट इंडिया द्वारा चिकित्सा अधिकारीयों को दिया प्रशिक्षण
■ जिले में अभी तक आर बी एस के के 21 बच्चों को मिला निःशुल्क लाभ
मऊ। जन्मजात क्लब फूट (टेढ़े पंजों) की समय पर पहचान और तुरंत पानसेटिव मैथड (प्लास्टर विधि) द्वारा सही समय पर सही इलाज के लिए वृहस्पतिवार को जिला चिकित्सालय के हड्डी रोग अनुभाग के चिकित्सा अधिकारियो को प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण मिरेकल फीट इंडिया के सहयोग से सदर अस्पताल मऊ में दिया गया। इसमें जनपद के विभिन्न ब्लाकों से आये क्लब फूट के दो साल से कम के बच्चों का उपचार प्लास्टर विधि द्वारा दिया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया कि आज प्रशिक्षण उपरांत सात क्लब फूट के बच्चों का उपचार किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के रिपोर्ट में प्रति एक हजार नवजात बच्चों में औसतन दो बच्चा जन्मजात क्लब फूट से ग्रसित होते हैं। यह जन्मजात विकृति है। यदि इसका सही समय पर सही इलाज नहीं हो तो वह जीवन भर दिव्यांगता से गुजरना पड़ सकता है।
डॉ सिंह ने बताया कि बच्चे के पैदा होने के बाद उसके विशेषज्ञ डॉक्टरों से लगातार जांच करवाते रहना चाहिए ताकि ऐसी बीमारी होने की सूरत में बच्चे का बिना देरी किये इलाज मिल सके।
मिरेकल फीट इंडिया संस्था द्वारा प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर डॉ आशीष श्रीवास्तव द्वारा बताया कि यदि जन्म के तुरंत बाद ऐसे बच्चे की इलाज शुरू हो जाए, तो बेहद शानदार नतीजे आते है। आज प्रशिक्षण उपरांत कुल सात बच्चों का उपचार प्लास्टर लगाकर किया गया जिसमें परिजन बहुत ही संतुष्ट एवं खुश हुए।
मिरेकल फीट इंडिया के रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर,वाराणसी भूपेश कुमार सिंह ने बताया कि संस्था द्वारा आरबीएसके के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 3000 से अधिक बच्चों का सफल इलाज हो चुका है। यह संस्था भारत सहित कुल 12 देशों में कार्य कर रही है। अभी तक पिछले दो वर्षो में जिले के विभिन्न ब्लाकों से 21 क्लब फूट से ग्रसित बच्चों को निःशुल्क लाभ प्राप्त हुआ है।अब वह सभी बच्चे समाज से अपने आप को जुड़ा महसूस कर रहे हैं।
आरबीएसके नोडल अधिकारी डॉ बीके यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार क्लब फूट के बच्चों का प्रत्येक वृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के हड्डी रोग अनुभाग में मिरेकल फीट इंडिया संस्था के सहयोग से निःशुल्क इलाज प्लास्टर विधि से किया जाता है । बच्चों को पांच वर्ष की उम्र तक करेक्टिव शूज भी निःशुल्क दिया जाता है।
डीईआईसी मैनेजर अरविंद वर्मा ने बताया कि जिले में अगस्त 2019 से मिरेकल फीट इंडिया संस्था के ब्रांच की शुरुआत हुई है, तब से अभी तक क्लब फूट के बहुत से बच्चे लाभान्वित हुए है, जिसमे आरबीएसके टीम के द्वारा संदर्भित लगभग 21 बच्चो का इलाज सफलता पूर्वक हुआ है।
इस शिविर के दौरान दौरान जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ ब्रिज कुमार,जिला प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर आनंद जी , प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव, मिरेकल फीट अयोध्या से शुचि सिंह, हेल्प डेस्क मैनेजर राम प्रवेश यादव , मिरेकल फीट इंडिया के रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर भूपेश सिंह, जिला अस्पताल के डॉ भीम सिंह, डॉ सुबोध चंद यादव,डॉ एपी गुप्ता, जिला अस्पताल गाजीपुर के डॉ तपिश,आरबीएसके टीम के डॉ एस के पांडेय, बच्चों के परिजन आदि लोग उपस्थित रहे।
