अपना जिला

कैसे शक की दृष्टि से देखूँ ईश्वर तेरे प्यार को…

( आशा साहनी )

कितना सुन्दर सज्ज किया है भगवन ने संसार को,
चलो चलें कुछ पल के खातिर जी लेते हैं प्यार को।

सूरज जब भी दिया उजाला,
धरती के कोने कोने,
अंधियारे में चांद निकलता,
धरती का अंधियारा हरने।

एक समान दिया है सबको जीने के अधिकार को,
चलो चलें कुछ पल के खातिर जी लेतें हैं प्यार को।

वर्षा की ऋतु आई जब भी,
भींग रही थी दशों दिशायें,
नाच रहे थे मन मयूरा,
पंख धरा पर फहराये।

हरियाली चादर ओढ़े दिखलाती अम्बर के प्यार को,
चलो चलें कुछ पल के खातिर जी लेते हैं प्यार को।

एक राह से सबको आना,
एक राह से जाना है,
जीवन की सारी दुविधाऐं,
एक पल में मिट जाना है।

कैसे शक की दृष्टि से देखूँ ईश्वर तेरे प्यार को,
चलो चलें कुछ पल के खातिर जी लेते हैं प्यार को।


लेखिका-आशा साहनी मऊ जनपद के फतेहपुर ताल नरजा की रहने वाली हैं।

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