खास-मेहमान

कुछ अलग : लद्युकथा – मिसाल…

जनरल मेनेजर की विजिट थी और सभी अपने आसपास सफाई और अपनी टेबल को साफ़ करने में लगे हुए थे . नेतराम रोज की तरह अपनी फाइलों में खोया हुआ था . अपनी मस्ती में मस्त जैसे की उसे किसी बात से कोई मतलब ही न हो .

कुछ ही देर बाद सब लोग अपनी-अपनी टेबल पर व्यस्त हो गए. सब इधर उधर देख रहे थे कि जनरल मेनेजर किस की टेबल पर रुकते हैं . नेतराम की टेबल पर कई फ़ाइल रखीं थीं . वह अपनी फाइलों में ही खोया हुआ था . जनरल मैनेजर उसकी टेबल के सामने खड़े रहे लेकिन वह अपने काम में लगा रहा .

“नेतराम ! साहब आये हैं .”

नेतराम अपनी कुर्सी से उठा और खड़ा हो गया . आफिस के अधिकारी और जनरल मेनेजर उसे देख रहे थे .

“आइये ! आगे चलते हैं .” जनरल मेनेजर कह कर आगे बढ़ गए . और राउंड लेकर कमरे में चले गए .

“नेतराम जी ! आपको साहब बुला रहे हैं .” चपरासी ने बताया .

सब लोगों में खुसर-पुसर शुरू हो गयी . आज तो नेतराम गया . सब उसके जाते ही तरह-तरह की अटकलों में व्यस्त हो गए .

“नेतराम जी ! आपको मालूम नहीं था क्या कि जनरल मेनेजर साहब आ रहे हैं .” उसके हेड ने पूछा .

“मालूम था सर ! और ये भी मालूम था कि मेरा काम क्या है और उनका काम क्या है . इसलिए मैं अपना काम कर रहा था . कंपनी मुस्कुराने और सिर्फ नमस्ते करने की तनख्वाह नहीं देती है सर !” नेतराम ने कहा .

“ठीक है आप जाइए .” और हेड ने जनरल मेनेजर को फोन लगा दिया . नेतराम अपनी जगह आकर फिर काम में लग गया .

जनरल मेनेजर और हेड ने फिर प्रवेश किया . नेतराम अब भी काम में लगा हुआ था .

“मिस्टर नेतराम ! हम आपके काम करने के तरीके से बहुत खुश हैं . आपके जैसी सोच और बेबाकी की हम कद्र करते हैं . हम आप को दो हजार रुपये का स्पेशल इन्क्रीमेंट देते हैं .” जनरल मेनेजर ने घोषणा की .

हाल में अब शंका की जगह ख़ुशी का माहौल बन गया था और नेतराम एक मिसाल .

शब्द मसीहा

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