रचनाकार

शब्द मसीहा : खोखले आदमी

( केदारनाथ )

“साहब! गाड़ी निकालने दीजिये । कितने ही फोन आ चुके हैं । सिलेन्डर खत्म हो रहे हैं अस्पताल में।” ड्राइवर बोला।

“अभी साहब आकर हरी झंडी दिखाएंगे तब जाना । पता नहीं ये साले रिपोर्टर भी कहाँ मर गए। फोन तो मुझे भी आ रहा है । थोड़ा-सा और रुक जा।”

“भाड़ में गया तुम्हारा रिपोर्टर …..साले वहाँ लोग मर रहे हैं और तुमको फोटो खींचना है । जा रहा हूँ …..मुझे नेता नहीं बनना है । पिछले ट्रक की खींच लेना , दो चार खाली ट्रक भी खड़े कर लेना …..खोखले आदमी।” और वह तेजी से गाड़ी में चढ़ अस्पताल की तरफ गाड़ी को बढ़ाने लगा ।

शब्द मसीहा

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