मऊ की बेटी डा.एरम ने BHU में MD की पढ़ाई के दौरान मिली छात्रवृत्ति की रकम से 04 सौ रजाई गरीबों की बीच बांटी

( आनन्द कुमार )

मऊ। जुनून होना चाहिए हर काम के लिए, मंजिल के लिए और अंजाम के लिए, शोहरतें मिलती रहेगी खुद ब खुद तुम्हें, बस बढ़ते रहो तुम देश के अभिमान के लिए। जी हां अगर आपके अंदर जुनून हो, जज्बा हो, तो आपके लिए कोई काम बड़ा नहीं होता। चाहे वह पढ़ाई का जुनून हो या फिर समाज में कुछ अलग कर जाने का जुनून, जुनून है तो आपको आपका मंजिल दिलाएगा आपको आपका सम्मान दिलाएगा।
बीएचयू से एमबीबीएस, एमडी की पढ़ाई के दौरान 19 गोल्ड मेडल हासिल करने वाली मऊ की माटी की धरोहर, व्यवसायी व कांग्रेसी नेता शफीक डायमण्ड की बेटी डॉ0 एरम नाहिद परिचय की मोहताज नहीं है। शुरू में पढ़ने में मेद्यावी रही डा. एरम पढ़ने के साथ पढ़ाई के दौरान मिले छात्रवृत्ति की रकम से कुछ ऐसा कर गई जिसे सदियों सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता है। डा. एरम ने अपने पढ़ाई के अगले चरण डीएम एंड्रोकोलोजी एम्स जोधपुर मे दाखिला लेने के बाद छात्रवृत्ति में मिली रकम से जरूरत मंदो के बीच 04 सौ रजाईयां बनवाकर अपने पिता शफीक डायमण्ड व उनके शुभचिंतकों के साथ बांटकर एक ऐसा इतिहास रचा है जो सदियों सदियों तक भुलाया नहीं जा सकता है। डा. एरम ने बीएचयू मेें अपने एमडी की पढ़ाई के दौरान मिली छात्रवृत्ति की रकम को गरीबों के बीच वितरित करने की इस तरह के सोच और कार्य के आगे हर कोई नतमस्तक है।
समाज के प्रति उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का इस तरह का यह सोच व कार्य यह संदेश जरुर देता है की अगर अगर मुठ्ठी-मुठ्ठी भर ही हम बदले, तो देश पुन: सोने की चिड़िया बन सकती है।
रविवार को नगर के डोमन पूरा स्थित शफीक डायमंड के कंपाउंड में जब मऊ की बिटिया डॉ. एरम ने अपने हाथों से इस भीषण ठंडी में गरीबों के हाथों में रजाई सौंप रही थी तो, इन गरीबों के चेहरे का मुस्कान देखने लायक था और यह सच है कि इस ठंडक में उन्हें उस एक रजाई की बदौलत इतनी सुकून मिला होगा, जिसका अंदाजा बयां कर पाना मुश्किल था। रजाई वितरण के दौरान मऊ वेलफेयर ट्रस्ट के सभी कार्यकर्ता पदाधिकारी तन मन धन से इस आयोजन में अपनी सहभागिता निभा रहे थे। इस दौरान डा. एरम नाहिद की मुस्कान इस गंभीरता के साथ झलक रही थी कि आज उसने कुछ अलग कर अपने आपको जीत लिया तथा अपने परिजन व मऊ का नाम गर्व से ऊंचा किया। इस दौरान डा. एरम ने बताया कि छात्रवृत्ति के रकम को गरीबों के बीच बांटने का उनका निर्णय उन्हें काफी सुकून दे रहा है। यह प्रेरणा उन्हें अपने पिता शफीक डायमंड से मिली है। उन्होंने कहा कि हर मनुष्य और हर व्यक्ति को अपने कार्यों के अलावा भी कुछ ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे समाज में वह नजीर बने तथा लोगों उनसे प्रेरणा लें। वह आगे भी इसी प्रकार गरीब ज़रूरतमन्दों की मदद करती रहेंगी। कहा कि मानव होने के नाते एक व्यक्ति का फर्ज है वह निःस्वार्थ भाव से दूसरे मनुष्य की सेवा करे, यही मानवता की सबसे बड़ा धर्म है।

इस दौरान कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी राष्ट्रकुंवर सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि डॉ एरम का इस प्रकार का सोच व कार्य उन्हें एक दिन सामाजिक सरोकारों में बहुत ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस डॉक्टर के अंदर ऐसी सोच और जज्बा होगी, जरूर वह समाज और देश के हित के लिए बना होगा। वही कांग्रेस जिला अध्यक्ष इंतखाब आलम ने कहा कि डॉक्टर इरम की सोच से मऊ का सिर गर्व से ऊंचा है हमें अपनी बिटिया पर नाज है।
अंत में सभी के प्रति शफीक अहमद डायमंड ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरा सम्मान मेरी बेटी की सोच की वजह से बढ़ रहा है। हम काफी खुश और गौरवान्वित हैं। उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर घनश्याम सहाय, अकरम प्रेमियर, हाफ़िज़ अहमद, ज़की नख्शबन्दी, मोहम्मद इस्माईल, ज़ाहिर सेराज, नसीम अहमद, कमरुल इस्लाम, इरफान मंज़ूर, शफीकुर्रहमान जमील अहमद आदि दर्जनों लोग मौजूद रहे।

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