रचनाकार

“बुढ़ापा”

( किशोर कुमार )


एक चुप सौ सुख,
बंद रखें अपना मुख।
कान में डालें रुई,
बातें करें आई गई।
नहीं होगा कोई असर,
जिंदगी होगी बसर।
हरदम हंसते रहें,
कुछ न कुछ करते रहें।
छोड़ दें बागडोर,
सुनते रहें शोर।
सामंजस्य बनेगा,
कलह क्लेश मिटेगा।
मोह को हटायेंगे,
शान्ति को पायेंगे।
सब कुछ समझा दिया,
आईना दिखा दिया।
प्रभु का आशीर्वाद,
ना करें समय बर्बाद।
🙏🌹🙏🌹🙏
किशोर कुमार धनावत रायपुर,
२०-४-२०२१

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *