खास-मेहमान

पूर्वांचल के लाल ने आईआईएम रोहतक में बनाया स्थान

● लॉकडाउन में फॅस गये थे, वहीं से तैयारी कर दी परीक्षा, आर्य समाज के गुरुकुल कुरुक्षेत्र हरियाणा के छात्र रहे

● गुरुकुल के प्रधानाचार्य रहे देवव्रत आचार्य इस समय गुजरात के गवर्नर हैं

मऊ जिले के ब्रह्मस्थान पर रहने वाले सामान्य परिवार के श्रेय रघुवंशी जो कि हरियाणा गुरुकुल में कक्षा 6 से पढ़ रहे थे और उन्होंने इसी साल ही 94.6% नंबरों से इंटरमीडिएट पास की और लॉकडाउन के दौरान सहारनपुर में रहकर उन्होंने आईआईएम रोहतक (इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट) में एंट्रेंस एग्जाम दिया जिसमें सफलता के साथ दूसरा स्थान प्राप्त हुआ अब इन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है।

मऊ जिले के थाना कोतवाली के अंतर्गत ब्रह्मस्थान पर रहने वाले तथा एक साधारण परिवार से आने वाले पत्रकार और अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह और शीला सिंह के दो बेटों में दूसरे नम्बर पर हैं। इनके बड़े भाई श्रेयांश रघुवंशी वह भी गुरुकुल कुरुक्षेत्र से ही छात्र रहे हैं और वर्तमान में लखनऊ यूनिवर्सिटी में शिक्षा ले रहे हैं।  राजीव सिंह (चाचा) की रघुवंशी स्टोर्स नाम की अपनी ब्यवसायिक प्रतिष्ठान है, राहुल सिंह (चाचा) जिले के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार हैं। आरएसएस के लिए समर्पित परिवार सँयुक्त रूप ब्रम्हस्थान सहादतपुरा में निवास करते हैं। श्रेय कक्षा 6 से गुरुकुल कुरुक्षेत्र (आर्य समाज) हरियाणा के छात्र हैं। जिस समय  इन्होंने  हरियाणा कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में टेस्ट पास करने में सफलता प्राप्त की उस समय आचार्य देवव्रत (वर्तमान में गुजरात के गवर्नर हैं) इस स्कूल के प्रिंसिपल हुआ करते थे। इस वर्ष उन्होंने इंटरमीडिएट कॉमर्स से 94.6% नंबरों के साथ पास किया। कोरोना का लॉकडाउन हो जाने के कारण इन्होंने सहारनपुर में अपने रिश्तेदार के यहाँ रुक गये थे। वहीं से आईआईएम रोहतक (इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट) का एंट्रेंस एग्जाम दिया था। श्रेय रघुवंशी ने अपने पहले प्रयास में ही सफलता के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करते हुए पूर्वांचल का भी गौरव बढ़ाने का काम किया है। अब उन्हें इंटरव्यू देने जाना है। इन्होंने दिल्ली के श्रीराम कालेज आफ मैनेजमेंट में भी टेस्ट दिया था जिसका सितंबर में परिणाम आना है। शांत स्वभाव के श्रेय गुरुकुल में हमेशा तेज बच्चों में शुमार होते रहे हैं। पढ़ाई के साथ साथ श्रेय खेल में भी अव्वल स्थान ने स्कूल में रखते थे। वह फुटबॉल के फारवर्ड राइट आउट प्लेयर के रूप में अपने स्कूल गुरुकुल कुरुक्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। फुटबॉल में पूरे हरियाणा के स्कूलों में उनका अपने प्रदर्शन में चौथा स्थान था और उन्हें खेलों के कारण स्कूल से स्कॉलरशिप भी मिला करती थी। अपने स्कूल फुटबॉल टीम के वाइस कैप्टन के रूप में उन्होंने प्रतिनिधित्व किया।
इन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने आर्य समाज के स्कूल के आचार्यों समेत अपने बाबा-दादी और परिवार को दिया है।

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