खास-मेहमान

काम की बात : कल से लागू हो रहे ई-वे बिल से सम्बंधित प्रावधानों की बारीकियां बता रहे हैं सीए रत्नेश कुमार सिंह

दिल्ली। पहली बार 01 फरवरी 2018 को लागू होने जा रहे देश भर में और कई राज्यों के भीतर माल आवाजाही पर ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया गया है। इससे सम्बंधित प्रावधानों पर बारीकियों को समझा रहे हैं दिल्ली स्थित एक फर्म में बतौर पार्टनर कार्यरत प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड एकाउंटेंट व मऊ जनपद के निवासी सीए रत्नेश कुमार सिंह।

01 जुलाई से संपूर्ण भारतवर्ष में लागू जीएसटी कानून के अंतर्गत कर-संग्रह’ माल के सप्लाई के स्थान’ के आधार पर वसूला जाता है। GST में राजस्व में हिस्सेदारी केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ही होती है। अतः GST में कर संग्रह होने पर राज्य के हिस्से का राजस्व उस राज्य का होगा जिस राज्य में (सप्लाई का स्थान) माल की सप्लाई होगी, जबकि जीएसटी पूर्व लागू कानून एक्साइज अधिनियम में उत्पाद शुल्क उत्पादन पर लगता था और VAT/CST अधिनियम में जिस राज्य से माल का परिवहन प्रारंभ हुआ है उस राज्य को कर लगाने का अधिकार था और उसी राज्य की आय मानी जाती थी। देश के संघीय ढांचे के अनुरूप यह यह नई व्यवस्था ‘माल के सप्लाई स्थान आधारित कर संग्रह’ न्यायसंगत भी है।

सप्लाई स्थान आधारित कर व्यवस्था के आधार पर जीएसटी लगने का परिणाम यह हुआ कि जिस जम्मू-कश्मीर में धारा 370 होने से केन्द्र द्वारा पूर्व में कोई कर कानून (सेवाकर इत्यादि) नहीं लग पाता था। वहाँ जीएसटी लागू होने के महज 7 दिनों बाद विधानसभा में जीसटी बिल पासकर लागू कर दिया गया, क्योंकि उस राज्य के उपभोग की वस्तुएं अन्य राज्यों से सप्लाई होती है। कश्मीरी व्यापारियों के जीएसटी में पंजीकृत न होने से बाहर के राज्यों के वस्तुओं पर चुकाए गये जीएसटी का क्रेडिट नहीं मिल पाता और वहाँ सामान अपेक्षाकृत महंगा पड़ रहा था।

◆ ई-वे बिल व्यवस्था लागू नहीं होने से अभी तक कोई माल किस राज्य में निर्मित हुआ है और किस राज्य में सप्लाई हुआ इसको सत्यापित करने का सरकार के पास जीएसटी अधिनियम में अभी तक कोई प्रभावी साधन नहीं था। इस कारण से बिना दस्तावेजों के आधार पर और बिना जीएसटी चुकाए कई क्षेत्रों में माल की सप्लाई कर देश में बड़े पैमाने पर कर चोरी हो रही है। सरकार की वैसे ही जीएसटी रिटर्न के दाखिल करने में हो रही कठिनाई के कारण व्यापारी द्वारा टैक्स नहीं जमा करने से घटती आय से परेशान थी वहीँ कर चोरी सरकार के लिए एक अलग परेशानी का कारण हो गया था।

🔹 ई- वे बिल हाइलाइट्स 🔹

परिणामस्वरूप 1 फरवरी 2018 से पूरे देश में और कई राज्यों में कॉमन पोर्टल के आधार पर ई-वे बिल व्यवस्था लागू हो रही है।

ई-वे बिल पोर्टल- https://ewaybill.nic.in

ई-वे बिल पर प्रश्नोत्तर आधारित कुछ स्पष्टीकरण

प्रश्न – क्या है ई-वे बिल ?

उत्तर- ई -वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है जो माल के एक स्थान से दूसरे स्थान पर (मूवमेंट) ले जाने हेतु साक्ष्य है। यह ई-वे बिल सम्पूर्ण देश के लिए कॉमन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जेनरेट किया जा सकता है।

◆ इसके 2 भाग हैं…

पार्ट अ (Part-A)-

1- माल प्राप्तकर्ता के जीएसटी नंबर का विवरण
2- माल सप्लाई का स्थान (पिन कोड)
3- बिल का नंबर और तिथि
4- माल का मूल्य
5- HSN कोड
6- ट्रान्सपोर्ट दस्तावेज नंबर*
7- ट्रान्सपोर्ट का कारण

ट्रान्सपोर्ट दस्तावेज नंबर-
रोड द्वारा – Goods Receipt Number or
रेलवे द्वारा – Railway Receipt Number or
हवाई जहाज द्वारा – Airway Bill Number or
समुद्री जहाज द्वारा- Bill of Lading Number

◆ पार्ट (Part- B)-

इसमें टान्सपोर्टर का विवरण होगा (वाहन संख्या इत्यादि)

SMS- ई-वे बिल के लिए SMS आधारित सुविधा भी उपलब्ध है। यदि उन्हें एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं तो इंटरनेट की सुविधा के अभाव में व्यापारी और ट्रांसपोर्टर विभाग या चेक पोस्ट पर जाये बगैर मोबाइल नंबर रजिस्टर करके ई-वे बिल की रिक्वेस्ट कर विवरण देकर ऑफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिल बनवा सकेंगे। इसके अतिरिक्त अन्य माध्यम हैं।
Android App
Site-to-Site integration
GSP ( Goods and Services Tax Suvidha Provider)

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प्रश्न- ई-वे बिल किस प्रकार का दस्तावेज है?

उत्तर- ई-वे बिल की विशेषताएं-

> जैसे वैट अधिनियम में जैसे प्रत्येक राज्य माल आयात हेतु घोषणा पत्र ( यूपी में फार्म – 38) मूवमेंट के साथ रखना अनिवार्य होता था उसी प्रकार अब माल के मूवमेंट के साथ अब ई-वे बिल रखना अनिवार्य होगा फर्क इतना है कि अब जीएसटी में इसके लिए काँमन पोर्टल बनाया गया है।

> यह 2 प्रकार के माल के आवाजाही पर लागू होगा

1- एक राज्य से दूसरे राज्य के माल परिवहन (Inter State Movement) – 1 फरवरी 2018 से लागू

जैसे सहादतपुरा- मऊ (उत्तर प्रदेश) का कोई रेडीमेड कपड़ा व्यापारी गाँधी नगर – नई दिल्ली से माल क्रय कर मंगवाता है तो तो यह “इंटर- स्टेट माल परिवहन” कहलायेगा और उस माल परिवहन के साथ ई- वे बिल जेनरेट करना अनिवार्य होगा।

2- राज्य के भीतर माल परिवहन (INTRA-STATE MOVEMENT) – अब तक 13+ 4 राज्यों में 1 फरवरी 2018

जैसे अली बिल्डिंग-सहादतपुरा मऊ (उत्तरप्रदेश) का चूड़ियों का थोक व्यापारी फ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) से माल क्रय कर मंगवाता है तो तो यह ‘इंट्रा- स्टेट माल परिवहन” कहलायेगा और उसके साथ भी ई- वे बिल जेनरेट करना अनिवार्य होगा क्योकि उत्तर प्रदेश उन 13 राज्यों में शामिल है जो १ फ़रवरी 2018 से राज्य के भीतर माल परिवहन पर ई- वे बिल अनिवार्य कर रहे हैं|

> अधिकारी जांच और सत्यापन की ऑनलाइन रिपोर्टिंग करेगें।

> जांच और सत्यापन के दौरान 30 मिनट से अधिक समय तक माल को मूवमेंट कराने वाले वाहन को रोके जाने पर ट्रांसपोर्ट्रर की इसकी जानकारी दे सकते हैं।

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प्रश्न- कौन ई-वे बिल जेनरेट करेगा?

उत्तर- ई-वे बिल निम्न व्यक्तियों को जेनरेट करना चाहिए-

1- प्रत्येक जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति यदि वह कोई माल की सप्लाई करता है।

2- इनवर्ड सप्लायर (माल प्राप्तकर्ता) अपंजीकृत सप्लायर से माल प्राप्त करता है।

1और 2 की व्याख्या- माल भेजने वाला (कन्साइग्नर), माल प्राप्त करने वाला (कन्साइग्नी) ई-वे बिल जेनरेट कर सकता है यदि वह स्वयं के वाहन से ,किराये के वाहन से,रोड द्वारा, रेलवे द्वारा’हवाई जहाज द्वारा, समुद्री जहाज द्वारा माल परिवहन कराता है।

3- यदि माल को सड़क मार्ग से परिवहन हेतु ट्रांसपोर्टर को सुपुर्द कर दिया जाता है और यदि माल भेजने वाला (कन्साइग्नर) या माल प्राप्त करने वाला (कन्साइग्नी) ई-वे बिल जेनरेट करने में असमर्थ है तो ई-वे बिल ट्रांसपोर्टर को ** बिक्री बिल, डिलीवरी चालान 🚚 इत्यादि दस्तावेजों के आधार पर जेनरेट करना होगा।

**जीएसटी अधिनियम की धारा 68 के अन्तर्गत ‘वाहन के इंचार्ज को’ ई-वे बिल को साथ में रखना अनिवार्य है यदि माल का मूल्य नियम 138 के नोटिफिकेशन में निर्दिष्ट राशि 50,000 रूपये से अधिक है।

4- अपंजीकृत ट्रांसपोर्टर अपने ग्राहकों के माल को मूवमेंट कराने के लिए ई-वे बिल काँमन पोर्टल पर खुद को प्रत्येक राज्य के लिए कुछ विवरण भरकर आधार बेस मोबाइल ओटीपी के माध्यम से इनरोलमेंट कर सकता है।

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प्रश्न- पार्ट अ (Part-A) रसीद से कैसे बिल जेनरेट होगा?

उत्तर- ई- वे बिल सिस्टम में पार्ट ‘अ’ (Part-A) में दस्तावेज का विवरण भरकर सेव कर देगें और जब एक बार माल व्यापारिक परिसर से परिवहन हेतु तैयार हो जायेगा तो यूजर पार्ट ‘बी’ (Part- b) या वाहन विवरण भर सकता है और माल परिवहन हेतु ई-वे बिल जेनेरेट कर सकता है।

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प्रश्न- जब माल का परिवहन हो रहा हो तो वाहन इंचार्ज( ड्राइवर आदि) को कौन-कौन से दस्तावेज रखना होगा?

उत्तर- वाहन इंचार्ज को माल का परिवहन के समय निम्न दस्तावेज अपने पास रखना होगा-

1- कर-बिल (Tax Invoice) या
2- सप्लाई बिल (Bill of Supply) या
3- डिलीवरी 🚚 चालान (Delivery Challan) या
4- बिल आँफ इन्ट्री (Bill of Entry)
5-ई-वे बिल की काँपी(Copy of the E-Way Bill)या 6- काँमन र्पोर्टल से जेनेरेट किया ई-वे बिल नंबर(eE-Way Bill Number)

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प्रश्न – ई-वे बिल की वैधता की गणना कैसे की जायेगी अर्थात जेनरेट करने के बाद ई-वे बिल कितने दिनों तक वैध होगा?

उत्तर- ई- वे बिल की वैधता हेतु समय की गणना उसके जेनरेट करने के समय से आनुमानित दूरी के आधार पर होगी।

नियमानुसार प्रत्येक 100 किमी के लिए 1 दिन वैध है और 100 किमी के पार्ट हेतु 1 दिन और जोड़ा जायेगा।

जैसे यदि आनुमानित दूरी 310 किमी है तो
पहले 300 दिन हेतु 300×1/100= 3 दिन
अगले 10 दिन (100 दिन का पार्ट) = + 1दिन

इस प्रकार ई – वे बिल की वैधता- कुल 4 दिन अनुमन्य

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प्रश्न- क्या ई-वे बिल को संशोधित/बदलाव किया जा सकता है?

उत्तर- एक बार ई-वे बिल जेनरेट करने के बाद संशोधित /बदलाव नहीं किया जा सकता है। केवल Part-B को अपडेट किया जा सकता है।

यदि ई-वे बिल गलत सूचना से जेनरेट किया गया है तो इसे रद्द कर फिर से नया ई-वे बिल जेनरेट कर सकते हैं। ई-वे बिल जेनरेट करने के 24 घंटे में रद्द किया जा सकता है।

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प्रश्न- यदि एक वाहन जिससे ई-वे बिल के माध्यम से माल परिवहन किया जा रहा हो और रास्ते में किसी कारणवश वाहन को बदलना पड़ रहा है तो क्या होगा?

उत्तर – चूँकि धारा 68 में वाहन स्वामी को 50000 रूपये से ऊपर के माल परिवहन करते समय वाहन इंचार्ज को ई -वे बिल रखना अनिवार्य है अतः उपरोक्त स्थिति में माल परिवहन हेतु उपयोग किये जाने वाले नये वाहन संख्या ट्रांसपोर्टर या अन्य व्यक्ति जिसने ई-वे बिल जेनरेट किया था उसे काँमन पोर्टल पर जाकर वाहन संख्या अपडेट करनी होगी।

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प्रश्न- क्या ई-वे बिल को जेनरेट करने का प्राथमिक दायित्व ट्रांसपोर्टर का है? उन्हें ई-वे प्रणाली में इनरोलमेंट क्यों कराना चाहिए?

उत्तर – बहुत सारे ट्रांसपोर्टर GST में पंजीकृत नहीं है परन्तु वो अपने ग्राहक की तरफ से माल का परिवहन करता है यदि माल का सप्लायर या प्राप्तकर्ता ई-वे बिल जेनरेट नहीं करता है अतः उन्हें ई-वे बिल अपने ग्राहक की तरफ से जेनरेट या वाहन संख्या इ वे बिल पर अपडेट करने के लिए इनरोलमेंट कर ट्रांसपोर्ट आई डी जेनरेट करना जरूरी है।

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प्रश्न- ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए क्या क्या दस्तावेज और सूचनाएं आवश्यक है?

उत्तर – ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए आवश्यक दस्तावेज और सूचनाएं

1- ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकरण

2- कर-बिल (Tax Invoice) या सप्लाई बिल (Bill of Supply) या डिलीवरी 🚚 चालान (Delivery Challan) या बिल आँफ इन्ट्री (Bill of Entry)

3- यदि माल परिवहन रोड द्वारा हो रहा है तो – ट्रांसपोर्टर आई डी या वाहन नंबर।

4- यदि माल परिवहन रेल, हवाई जहाज , समुद्री जहाज द्वारा हो रहा है तो ट्रांसपोर्टर आई डी या ट्रांसपोर्ट दस्तावेज नंबर और दस्तावेज की तिथि।

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प्रश्न- क्या सभी तरह के माल आवाजाही में ई-वे बिल की आवश्यकता है ?

उत्तर- नहीं, कुछ दशाओ में ई-वे बिल जेनरेट करने की आवश्यकता नहीं होती है जैसे

1- जब माल को बिना मोटर वाले साधन से ले जाया जा रहा हो जैसे, तांगा, ठेलागाड़ी, मानवचालित साधन, इत्यादि से

2- माल को बंदरगाह, हवाई बंदरगाह ,लैंड कस्टम स्टेशन से इनलैंड कंटेनर डिपो कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर कस्टम निकासी हेतु ले जाया जा रहा हो।

3- सरकार द्वारा अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट माल।

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प्रश्न- यदि एक ट्रांसपोर्टर एक साथ कई ग्राहकों का माल एक ही वाहन में ले जा रहा हो तो ऐसी दशा में ट्रांसपोर्टर को क्या करना चाहिए ?

उत्तर – यदि ट्रांसपोर्टर बहुत ढेर सारे ग्राहकों का माल एक ही वाहन में एक साथ ले जा रहा हो तो वह प्रत्येक ग्राहक के माल के ई-वे बिल को दर्शाते हुए समेकित इ वे बिल (consolidated e-way bill) GST EWB-02 फॉर्म पर जेनरेट सकता है।

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प्रश्न- चेक पोस्ट पर वाहन रोके जाने पर वाहन इंचार्ज क्या करेगा ?

उत्तर – GST का कोई अधिकृत अधिकारी GST EWB-03 के Part A पर रास्ते में माल के जाँच के सम्बन्ध में 24 घंटे में संक्षिप्त रिपोर्ट रिकॉर्ड करेगा| अंतिम रिपोर्ट माल के जांच के 3 दिन के अंदर के GST EWB-03 के Part B पर अधिकृत जाँच अधिकारी देनी होगी।

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प्रश्न- क्या वाहन को हर चेक पोस्ट पर जांचा जायेगा ?

उत्तर- नहीं, कोई भी माल रास्ते में केवल एक बार ही जांच किया जायेगा परन्तु यदि कर चोरी की विभागीय अधिकारियों को कोई विशेष सूचना प्राप्त हुई हो तो वाहन को पुनः जांच हेतु रोका जा सकता है।

चेक पोस्ट या रास्ते में विभागीय अधिकारीयों द्वारा 30 मिनट से ज्यादा गाडी रोकी जाये तो ट्रांसपोर्टर कॉमन पोर्टल पर में सूचना अपलोड कर सकता है।

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प्रश्न- और अंत में इ वे बिल के सम्बन्ध में जुर्माना का क्या प्रावधान है?

उत्तर- जुर्माने का प्रावधान- जहाँ भी अपेक्षित हो अगर CGST नियम 138 के अनुसार ई-वे बिल जारी नहीं किया जाता है तो CGST अधिनियम 2017 की धारा 122 के अंतर्गत कानून का उल्लंघन माना जायेगा और जो करयोग्य व्यक्ति बिना ई-वे बिल के करयोग्य माल का परिवहन करता है तो 10,000 रुपये या कर के बराबर की राशि (जहां कर राशि दर्शाया गया हो) जो भी अधिक हो के बराबर जुर्माना लगाया जायेगा।

मॉल जब्ती का प्रावधान- CGST अधिनियम 2017 की धारा 129 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कोई माल ट्रांसपोर्ट करता है या स्टोर करता है और रास्ते में अधिनियम के प्रावधानों का और नियमों का उल्लंघन करता है तो वह सारा माल और ट्रांसपोर्ट करने का साधन, दस्तावेज जब्त कर लिए जायेंगे।

🔹 ई- वे बिल हाइलाइट्स 🔹

> 1 Feb 2018 से अगर माल 10 km की दूरी से अधिक भेजना है और Rs. 50, 000/- की कीमत से ऊपर के माल के लिये ई-वे बिल अनिवार्य है।

> जिन- जिन दशाओं में ई-वे बिल जरूरी नहीं नीचे विस्तार से बताया गया हैं।

> Rs. 50, 000/- के ऊपर की कीमत के माल HSN नंबर के ई-वे बिल में जरूरी है ।

> 50, 000/- रूपये की कम कीमत के माल की आप पहले की तरह वैध दस्तावेजों के आधार पर भेजें।

> सुनिश्चिंत करने के बाद ही ई -वे बिल जेनरेट करें कि माल से लदी गाड़ी उसी दिन निकल जायेगी या नहीं क्योंकि विभाग द्वारा प्रति 100 किमी तक या प्रत्येक 100 किमी के पार्ट हेतु माल भेजने का 1 दिन (24 घंटे) का वैध समय निर्धारित किया गया है अन्यथा ई-वे बिल अमान्य हो जायेगा।

> अगर गाड़ी रास्ते में खराब हो जाती है तो ई वे बिल में गाड़ी नंबर अपडेट करने के बाद ही दूसरी गाड़ी से माल ले जा सकेंगे।

> समेकित (Consolidated E-way Bill /EWB-2) जारी किया जा सकता जब कई ग्राहकों का माल एक गाड़ी में ले जाया जाया जा रहा हो।

अगर आपको आर्थिक मामलों के सलाहकार CA रत्नेश कुमार सिंह का यह सुझाव और विचार पसंद आए तो कृपया इस खबर को शेयर जरूर करें ताकि अन्य किसी व्यापारी बंधु को ई-वे बिल संबंधित जानकारी मिल सके, यह रत्नेश सिंह का निजी विचार है।

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