रचनाकार

इसीलिए ईश्वर से पहले, प्रथम तुम्ही हो पूजे जाते

शिक्षक दिवस विशेष…

मधुलिका बरनवाल

मैं लघु मूढ़ अणु स्वरूप सा,
तुम महान हो देव सदृश सा,
संसार लिप्त है अंधकार में,
तुम्ही व्याप्त हो दिव्य प्रकाश सा,
अभिनंदन जन-जन करते है,
त्रिलोक में सब वंदन करते हैं।
बिना तुम्हारे लक्ष्य है मुश्किल,
चर अचर गुंजन है करते ।
निश्छल मन से राह दिखाते,
कंटक विहीन जिसे कर जाते,
अनंत असीम आशीष भी देकर,
शिष्यों को तुम पार लगाते,
नर, किन्नर हर योनि को तुम ही,
भव सागर से पार लगाते।
इसीलिए ईश्वर से पहले,
प्रथम तुम्ही हो पूजे जाते ।।

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