आचार्य द्विवेदी ने आलोचना में सामाजिक चेतना के सरोकारों से जोड़ा है : डॉ0 उदय प्रताप सिंह

■ मऊ में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिन वक्तताओं ने रखे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान पर अपना-अपना विचार

मऊ। डीसीएस खण्डेलवाल पीजी कालेज़, मऊ एवं हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिन आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का योगदान विषयक पर बोलते हुए मुख्य अतिथि हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ0 उदय प्रताप सिंह ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह आचार्य द्विवेदी ने आलोचना में सामाजिक चेतना के सरोकारों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी सिर्फ हिन्दी भाषा और साहित्य तक सीमित नहीं थे, अपितु ज्ञान के अन्य क्षेत्रों पर भी पर्याप्त लिखा। उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी अंग्रेजी के गंभीर अध्येता थे और उन्होंने अंग्रेजी के श्रेष्ठ साहित्य का न केवल हिन्दी में मौलिक अनुवाद प्रस्तुत किया अपितु पश्चिम के तमाम चितकों की जीवनी लिखकर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। उन्होंने बताया कि मिल की पुस्तक का स्वाधीनता नाम से अनुवाद करके आधुनिकता के मूल्यों के हिन्दी साहित्य एवं भाषा में जगह दी और हिन्दी जगत का परिचय कराया।


विशिष्ट अतिथि मारीशस के विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव प्रो0 विनोद कुमार मिश्र ने अपने आनलाइन उद्बोधन में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के विविध पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और सुदूर इस चर्चा के लिए महाविद्यालय को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि आचार्य द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के माध्यम से हिन्दी जगत को न केवल जगाया अपितु रचनाकारों का मार्गदर्शन भी किया। चिट्ठी लिख-लिखकर उन्होंने रचनाकार पैदा किए।
नार्वे के ओस्लो विश्वविद्यालय से जुड़े और पत्रकारिता के क्षेत्र में नार्वे में चालीस वर्षों से पत्रकारिता में काम करने वाले डॉ0 सुरेश चन्द शुक्ल ने बताया कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के सम्पादन से सन् 1903 म जुडे इसके लिए उन्होंने अपनी रेलवे की 200 रुपए की नौकरी छोड़ दिया और सम्पादन का कार्यभार ग्रहण किया। उनका हिन्दी के लिए समर्पण आज के हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रेरणा का काम करता है।
विशिष्ट अतिथि चीन के ग्वांगझो विश्वविद्यालय से आए डॉ0 गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की स्त्री-विषयक चिंतन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आचार्य द्विवेदी सामाजिक सरोकार के रचनाकार होने के नाते स़्त्री शिक्षा के पक्षधर थे और इसके लिए खुल लिखा।
धन्यवाद ज्ञापन हिन्दी विभाग के डॉ0 प्रद्युम्न पासवान ने किया।
तीन बजे प्रारम्भ हुए प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से आए मुख्य वक्ता डॉ0 सत्यप्रिय पाण्डेय ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा किसानों के लिए उठाए गए मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि उनकी सरस्वती पत्रिका का कोई ऐसा अंक नहीं मिला जिसमें किसानों पर लेखन नहीं मिलता हो। सही में हिन्दी साहित्य में आधुनिक चेतना लेने वाले वास्तव में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किया और साहित्य की भाषा और विषय का भी विस्तार दिया। ऐसे उन्होंने सम्पत्ति के विचार का भी विस्तार किया है। उन्होंने बताया कि तुच्छ से तुच्छ चीज भी सम्पत्ति हो सकती है, बशर्ते उससे बाजार में कुछ मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि महावीर प्रसाद द्विवेदी के रचना-संसार में स्वदेशी आंदोलन की तीक्ष्य अभिव्यक्ति मिलती है। स्वदेशी और किसान को वे हिन्दी साहित्य के केन्द्र में लाते हैं और उस समय की कविताओं में गाँव एवं शहर की दुर्दशा का सुन्दर चित्रण देखने को मिलता है।
अध्यक्षता करते हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो0 अजय कुमार ने आचार्य द्विवेदी के रचनाकम्र की विविधता पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि आज आचार्य द्विवेदी पर चिंतन आज के समय की मांग है। आज हिन्दुस्तान की परिस्थिति को समझने के लिए आचार्य द्विवेदी के रचना-संसार का अध्ययन आवश्यक हो गया है।
इसी सत्र में सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय की डॉ0 नीलम सिंह ने आचार्य महावीर प्रसाद के द्विवेदी की रचनाधर्मिता पर अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन डॉ0 प्रद्युम्न पासवान ने किया और धन्यवाद ज्ञापन पूनम ठाकुर ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन अतिथियों द्वारा किया गया, उसके बाद वाणी वंदना, विशाल पाण्डेय ने प्रस्तुत की। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ में डॉ0 कमलेश कुमार राय ने हिन्दी वन्दना से किया। अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य व अध्यक्षता कर रहे डॉ0 अरविन्द कुमार मिश्र किया और हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज का आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रो0 सिद्धार्थ शंकर, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, डॉ0 राकेश कुमार सिंह, पत्रकार, दिल्ली, डॉ0 रामप्रवेश सिंह, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, मऊ, डॉ0 चन्द्र प्रकाश राय, डॉ0 कमलेश कुमार राय, डॉ0 तपस्या, डॉ0 सूर्यभूषण द्विवेदी, डॉ0 अखिलेश वर्मा, डॉ0 भोलानाथ गुप्त, विशाल पाण्डेय, धीरज मिश्र, दीपा मद्धेशिया, अल्पना चौधरी, धर्मेन्द्र, उमेश, शुभम, संदीप, रंजना, मधु, राहुल, अन्तरा, प्रीति, आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

IPL-2020 UPDATE NEWS

कौन बनेगा IPL-2020 का किंग ?