रचनाकार

हथियार इसका लापरवाही खौफ इसका मास्क है

(विनीता दीक्षित पांडेय)

खाली-खाली सी ये फिजाएं,

हवाएं चीख-चीख कर बोल रही हैं
पता नहीं कितनी जिंदगियां
खूनी सड़कों पर दौड़ रही हैं

सफर लिबास का होगा या रूह का
एक डर कोरोना महामारी छोड़ रही है
बेफिक्र सांसे घूम रही थी
अब फिक्र से रूह कांप रही है

कोरोना को तुम छुओ नहीं
यह सांसों में विष घोल रही है
हथियार इसका लापरवाही खौफ इसका मास्क है
सजग रहो ऐ इंसान सावधानी इसकी कमर तोड़ रही है

           

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