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सुझाव : पंचायत चुनाव में चुने गए प्रतिनिधियों व प्रत्याशियों को इस महामारी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी

( बृजेश )

भारत के ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस का संक्रमण अब बड़ी तेजी से फैल रहा है। वास्तव में यह बहुत चिंताजनक स्थिति है। शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में चिकित्सीय ढांचा बहुत कमजोर है ऐसी स्थिति में यह महामारी ग्रामीण लोगों को ज्यादा प्रभावित कर रही है ।हालात बद से बदतर न हो इसके लिए अभी हाल ही सम्पन्न हुए पंचायत चुनाव में चुने गए प्रतिनिधियों व प्रत्याशियों को इस महामारी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी क्योंकि इन लोगों ने जन सेवा के लिए ही राजनीति का रास्ता चुना है। इस महामारी से निपटने के लिए हर गाँव में एक संगठन या समिति बनानी पड़ेगी जिसमें राजनीतिक प्रतिनिधियों के अतिरिक्त कुछ पढ़े लिखे लोगों को भी शामिल करना होगा। जैसे आप ने देखा होगा कि हर गाँव नवयुवक मंगलदल होता है और ऐसे कई संगठन होते हैं। हांलाकि कि संगठन के सदस्यों के लिए यह कार्य जोखिम भरा हो सकता है लेकिन अत्यधिक सावधानी से अगर योजना बनाई जाए तो मुझे ऐसा लगता है कि कुछ हद तक कोविड के संक्रमण को कम करने में हमें सफलता प्राप्त हो सकती है। ग्रामीण स्तर पर इस महामारी से निपटने का जो माॅडल होना चाहिए उसके अन्तर्गत आपसी सहयोग से संगठन के पास कम से कम एक थर्मल स्कैनर एवं दो ऑक्सीमीटर होना चाहिए ,जिससे यह पता चल सके कि किसे कोरोना सम्बंधित थोड़ी-बहुत समस्या है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संगठन के सदस्यों द्वारा गाँव के सभी लोगों को जागरूक करना चाहिए कि वो मास्क का प्रयोग करें और शारीरिक दूरी बनाएं रखें ।साथ ही संगठन के सदस्यों को चाहिए कि वह ऐसे लोगों को चिन्हित करें जिनमें कोविड के थोड़े बहुत लक्षण दिखाई दे रहें हैं ,ऑक्सीमीटर द्वारा उनका Spo2 चेक कर लें यदि उनका Spo2 का लेवल 96 या उससे ऊपर और बुखार हो तो उन्हें घर में ही आइसोलेट कर दें और उन्हें काढ़े के साथ-साथ बुखार की सामान्य दवाएं(कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार) लेने की हिदायत दें। जिनका Spo2 93 या 93 से कम हो उनको संगठन या समिति के सदस्यों द्वारा गाँव के किसी बगीचे में शिफ्ट करके ब्लाक स्तर बनी निगरानी समिति को सूचना देने के साथ-साथ आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत दवाओं को उपलब्ध कराने की तत्परता दिखाएं । ऐसे लोगों का डिटेल(ग्राम,नाम ,पिता का नाम ,Spo2 आदि) एक रजिस्टर में अंकित कर निगरानी समिति या सम्बंधित प्राथमिक / सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के मेडिकल ऑफिसर को उपलब्ध करायें ताकि उनके लिए जल्द से जल्द जरूरी मेडिसन कीट की माँग की जा सके। आयुष-64 और कूका सीरप,सितोपलादि व त्रिकटु चूर्ण की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है ।समय-समय पर ग्राम पंचायतों का सैनेटाइजेशन भी कराने का प्रयास किया जाना चाहिए। आपसी सहयोग एवं सामुहिक समझदारी से हम इस महामारी को हरा सकते हैं। यदि आइसोलेशन की सुविधा अगर घर में न हो तो ग्राम पंचायत भवनों का इसके लिए प्रयोग किया जा सकता है । एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी को कोरोना का थोड़ा-बहुत लक्षण दिखाई दे तो उसे हल्के में न लें ।शुरूआती इलाज इस संक्रमण को आसानी से रोक सकता है ।
सकारात्मक सोच के साथ इस महामारी के साथ लड़ने में सहयोग प्रदान करें ।

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