व्यापारी नेता मौलवी सफीउल्लाह का निधन
मऊ। की अज़ीम मजहबी, सामाजिक, कारोबारी शख्सियत मौलाना सफिउल्लाह साहब का आज दिन में 12 बजे 85 वर्ष की आयु में देहांत हो गया।
मौलाना 16 साल तक मऊ की सबसे बड़ी दिनी तालीमी दर्सागाह मदरसा मिफ्तहुल ओलूम के अध्यक्ष रहे। 1984 से मरते दम तक मरकजी मऊ रिलीफ कमेटी के अध्यक्ष रहे। इसके इलवा वर्षों तक मौलाना सूता कमेटी और व्यपार मण्डल के भी नगर अध्यक्ष रहे।
मौलाना मऊ के बड़े कारोबारी घराने में मोहम्मद दलाल साहब के सुपुत्र थे। मौलाना मरहूम को फुटबाल से खास लगाव था, जिसके कारण लंबे समय तक आज़ाद सपोर्टिंग क्लब के अध्यक्ष रहे। मौलाना मरहूम मौलाना अब्दुल लतीफ नोमानी साहब और उनके बेटे राज्य सभा के सांसद मौलवी हबीबुर्रहमान नोमानी के दस्ते रास्त थे।
मौलाना का पूरा घराना राजनैतिक समझ बुझ वाला घराना समझा जाता था। मौलाना के चाचाजाद भाई मौलवी हबीबुल्लाह साहब कई बार नगरपालिका मऊ के चेयरमैन चुने गए। मौलाना ने अपने सभी बेटे बेटियों को तालीम से आरास्ता किया जिसका नतीजा ये है के आज भी उनके घर में अधिवक्ता से लेकर अध्यापक के कई पदों पर लोग कार्यरत हैं।
मौलाना के साथ मुझे पिछले 25 वर्षों से कम करने का अवसर मिला। मौलाना में सबसे खास बात ये थी के मौलाना दूर दृष्टि रखते थे, कभी जज्बाती बात नहीं करते थे। बहुत कम मीटिंगों में बोलते थे मगर जब बोलते थे तो सब लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनते थे और उनके सुझाव पर अमल करते थे। मौलाना का जो सम्मान मुस्लिम समाज में था वहीं सम्मान हिन्दू व्यापार जगत और राजनैतिक लोगों में भी था।


मौलाना के जनाजे की नमाज़ डोमानपुरा कसारी के सहन में 7 बजे शाम को अदा की गई और अंतिम संस्कार उनकी अबाई कब्रिस्तान में किया गया। अन्तिम संस्कार में लाक डाउन के बावजूद भी भारी भीड़ रही, मगर लोगो ने सोशल डिस्टीनशिंग का पालन किया। लाक डाउन के कारण हजारों लोग जनाजे की नमाज़ में शरीक नहीं हो सके।
मौलाना जैसी मऊ में ऐसी कोई शख्सियत नहीं है जो सब के लिए सर्वमान्य हो। अल्लाह से दुआ है के मौलाना ने जैसे दुनिया में कमियाबी के साथ जीवन बिताया अखेरत में भी उनको कमियाबी मिले।
