साहब मंदिर/मस्जिद बनाने के साथ-साथ, महिलाओं के आबरू से कोई ना खेले कोई ऐसा कठोर कानून बना दिजीए
✍️ रोशनी जायसवाल…
साहब आपने राम मन्दिर की नींव रहकर हिन्दुत्व को तो जीता दिया, तीन तलाक कानून लाकर मुस्लिम समाज की महिलाओं को सम्मान दिया। पर नारी की इज्जत पर अभी तक आपने कोई कठोर फैसला नहीं लिया। हर रोज ना जाने कितनी नारी दरिंदों की शिकार बन रही है। आखिर कब तक हम सिर्फ सोशल मीडिया पर नारी सशक्तिकरण पर सिर्फ बातें करते रहेंगे? आखिर कब तक महिलाएं यूं डर-डर कर जीती रहेगी ? आखिर क्यों एक माता पिता बेटी के जन्म पर डर और सहम से जाते हैं। आपने बहुत बड़े-बड़े वायदे किये, पर क्या उनमें से एक वायदा ये नहीं था कि जो नारी के आबरू से खेलेगा उसका अंजाम वो होगा जिससे लोगों कि रूह कांप जाये। पर आखिर कब तक मां बाप डर-डर के अपने बेटियों को रखेंगे ? आज एक 13वर्ष की बच्ची हैवानों की शिकार हो गयी कुछ दिन पहले ही अभी भारत की होनहार बेटी जो अमेरिका की सरकार से छात्रवृत्ति पाकर पढ़ती, वहां अंजाने देश में वो सुरक्षित थी पर उसे क्या पता था कि हैवानों की बलि तो अपने ही देश में चढ़ेगी कहते हैं कि हम सब आजाद भारत में जीते हैं पर नहीं साहब जबतक बेटीयां सुरक्षित नहीं है। हम आजाद भारत में नहीं है। आखिर पुरूष क्यो भूल जाता है कि वह उसी महिला के गर्भ से जन्म लिया है जिसकी इज्जत यूं सरेआम निलाम कर रहा है। साहब एक फैसला ऐसा भी ले लो जिससे बेटियों पर कोई नजर भी उठाकर ना देखे। उस दिन आपको वोट मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप खुद ही लोगों के नजर में भगवान कहलाएंगे। हमारे देश में महिला के साथ अभद्र व्यवहार एक पुरुष करता पर गलत महिला को कहा जाता है। हमारे मंत्रीगण कहते हैं कि लड़की ने ही कुछ ग़लत पहना होगा, उनके पहनावे पर रोक लगाओ, उनके हाथों में मोबाइल फोन ना दो, पर साहब मैं आप सभी से एक बात पूछना चाहती हूं कि क्या दो साल, पांच साल, आठ महिने, आठ दिन की लड़की ने भी उनसे हंसकर बात की थी या उन बच्चियों के लिवास में भी नग्नता झलक रही थी। हमारे वहां तो 80 वर्ष की महिला के साथ -साथ भेड़-बकरियां जानवर तक सुरक्षित नहीं है, नारी के आबरू के भूखे हैवान उन बेजुबानों को भी अपना शिकार बना लेते समझ नहीं आता कि इनकी मानसिकता क्या है। क्यू ये मासूमियत के साथ खेल जाते, हंसता खेलता बचपन छिन लेते, मैं सरकार से बस एक निवेदन करना चांहुगी कि साहब हमारे देश में मन्दिर और मस्जिद बहुत है पर बेटियों की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है। है भी तो उसके परिणाम आते-आते स्थिति और नासूर बन जाती है। साहब अगर ऐसा ही रहा तो हमारा भविष्य अंधकारमय है। क्योंकि कोई मां-बाप अपने बेटी को जन्म लेते ही मार देगा और जो बेटियां इस धरती पर होगी वो रोज हैवानों के हाथों मरेगी। तब आपका ये मन्दिर और मस्जिद धराशाई हो जायेंगे। क्यूंकि उनकी नींव भी मां दुर्गा से ही है और मस्जिद की नींव पैगम्बर मुहम्मद साहब से ही हमारे देश में नवरात्रि में कन्याओं को पूजा जाता है, ईद में कन्याओं को ईदी देकर पूजा जाता है। फिर उन्हीं कन्याओं को समाज के कुछ कलुषित नाग अपना शिकार बनाकर समूचा पुरुष समाज को बदनाम करते हैं। पर अफसोस हमारे देश में वायदे तभी किये जाते हैं, जब चुनाव सामने हों। साहब बचा लो बेटियों को क्योंकि तुम्हारी कुर्सी उन्ही के अंश से है और तुम्हारा ही नारा है बेटी बचाओ, बेटी पढाओ।
लेखिका : सिविल लाइन भुजौटी मऊ की निवासी है।

