खास-मेहमान

रेड लाईट

“तुम बहुत ही अजीब इंसान हो , जब मैंने कहा कि कुछ पैसे दे दो तो तुमने मना कर दिया और ये भिखारिन को दो सौ रुपये झट से दे दिए . क्या मैं भिखारिन के बराबर भी नहीं ?” स्कूटर के पीछे बैठी पत्नी झल्लाते हुए बोली .

“ऐसा क्यों कहती हो ? तुम अपनी तुलना उससे करो यह ठीक नहीं . वह मजबूर है , हो सकता है कि झूठी भी , किन्तु इस सब के बाद भी उसकी दशा तुमसे बहुत बुरी है . जब वह अपने बच्चे की जान की सलामती के लिए इतने नीचे गिरकर पाँव पकड़ सकती है तो क्या मैं इन्कार कर उस से भी नीचे गिर जाऊं . क्या तुम मेरा पतन चाहती हो ?”

केवल दो बूँद आंसू कंधे को गीला कर जवाब दे गए थे . गाड़ी चल पड़ी थी रेड लाईट हरी होने पर और हाथ की पकड़ कंधे से कमर पर पहुँच गई थी .

शब्द मसीहा

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