बिल्थरारोड में 132/33 विद्युत उपकेन्द्र के स्थापना की मांग
(अशोक जायसवाल)
बिल्थरारोड/बलिया। क्षेत्र में 132/33 केवीए का विद्युत उपकेन्द्र के स्थापित न होने से गर्मी के दिनों में वोल्टेज ड्राप व फाल्ट के चलते जहां सिंचाई का बाधित होना आम है वहीं ब्रेक डाउन की स्थिति में विभागीय सर्च में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आज भी तहसील में स्थापित 33/11 उपकेन्द्रों व सिंचाई व्यवस्था सिकन्दरपुर, रसड़ा व सेमरी, मऊ के 132/33 उपकेन्द्रों पर निर्भर है।
क्षेत्र को विद्युत समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिए भले ही 33/11 केवीए के कई उपकेन्द्र स्थापित कर लिये गये है। परन्तु जब तक 132/33 केवीए का विद्युत उपकेन्द्र स्थापित नही हो जाता तब तक क्षेत्रवासियों को विद्युत समस्या से निजात दिलाना संभव नही है। आज भी यह क्षेत्र विद्युत आपूर्ति के मामले में सेमरी, सिकन्दरपुर व रसडा़ के 132/33 केवीए के विद्युत उपकेन्द्रों पर निर्भर है। सिकन्दरपुर उपकेन्द्र से जहां 33/11 केवीए के अवायांए माल्दहए तहसील स्तरीय उपकेन्द्र व पम्प कैनाल जुड़ा हुआ है वहीं रसडा़ उपकेन्द्र से 33/11 केवीए के नगरा एवं सेमरी के उपकेन्द्र से 33/11 पशुहारी, रजईपुर व इब्राहिमपट्टी पावर ग्रिड को आपूर्ति होती है। इसके अलावा प्रस्तावित 33/11 दिलमन मधुकीपुर, तुर्की दौलतपुर व दोथ अखोप उपकेन्द्र के भविष्य में बन जाने की स्थिति में भी इन्हे अन्यत्र स्थानो के 132/33 विद्युत उपकेन्द्रो पर ही निर्भर होना होगा। इन उपकेन्द्रों के साथ ही सिंचाई सुविधा सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित लघुपंप डाल नहर हल्दीरामपुर व चैनपुर गुलौरा को भी सिकन्दरपुरए रसड़ा व सेमरी से जोड़ जाना है। अलग-अलग स्थानो से जुड़े होने के चलते जहां गर्मी के दिनो में क्षेत्र को विद्युत ड्राप व फाल्ट जैसी समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है वहीं ब्रेक डाउन की स्थिति में विभागीय सर्च में भी काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते क्षेत्र की आपूर्ति 22 से 24 घंटे तक ठप हो जाती है। जिससे लोगों में हाहाकार की स्थिति रहती है। यदि बिल्थरारोड तहसील क्षेत्र में ही 132/33 केवीए का विद्युत केन्द्र स्थापित हो जाने की स्थिति में लोगों को विद्युत आपूर्ति सम्बन्धी कठिनाइयों से स्वतः निजात मिल जायेगी। वर्तमान समय में क्षेत्र में 33/11 केवीए के 7 विद्युत केन्द्र संचालित हो रहे हैं तथा 5 प्रस्तावित हैं। इस प्रकार दूसरे क्षेत्रों के विभिन्न उपकेन्द्रों पर और भार बढ़ना निश्चित है। जब वर्तमान समय में ही काल ड्राप व लो बोल्टेज की स्थिति है तो एक दर्जन उपकेन्द्रों के होने पर विद्युत आपूर्ति का हाल आसानी से समझा जा सकता है। विद्युत अधिकारियों की मामने तो बिना उपकेन्द्र केन्द्र की स्थापना के इसे औद्यागिक क्षेत्र भी नही घोषित किया जा सकता है। पिछले दिनो विधायक धनन्जय कन्नौजिया के प्रयास से 132/33 केवीए के उपकेन्द्र की स्थापना हेतु अखोप में जिलाधिकारी की अगुवाई में प्रा0वि0 विद्यालय की चिन्हित भूमि को फिलहाल बीएसए से विद्युत विभाग को स्थानान्तरण का इंतजार है।

