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प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर वक्ताओं ने रखे विचार, योग की महत्ता पर डाला प्रकाश

मऊ। राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस का जिलास्तरीय कार्यक्रम क्षेत्राधिकारी डॉ. शमसुद्दीन अंसारी, इकराम मुस्तफा, डॉ. एस. एन. राय और प्रमोद राय की अध्यक्षता में सोमवार को श्याम संजीवनी अस्पताल में योग वैलनेस सेन्टर कासिमपुर और नगर मऊ तथा भारत विकास परिषद मऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि डॉ.अलका राय, प्रतिष्ठित अधिवक्ता अनिल जी और रविश तिवारी थे। डॉ. अलका राय ने बताया कि हमारे रोगों का मुख्य कारण हमारा प्रकृति से दूर होना है। वहीं कार्यक्रम में योग प्रशिक्षक विश्वा व संजीत ने प्राकृतिक चिकित्सा के प्राचीन इतिहास व नये इतिहास, उत्पत्ति, सिद्धांत और उपादेयता सहित यह भी बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा के जनक बेनेडिक्ट लस्ट और भारत में डॉ दिनशॉ के. मेहता थे। महात्मा गांधीजी,मोरारजी देसाई, मैथिली शरण गुप्त, विनोबा भावे सरोजिनी नायडू इत्यादि नेचुरोपैथी के बहुत बड़े प्रशंसक थे और गांधीजी ने सर्वप्रथम भारत में आल इंडिया नेचर क्योर हॉस्पिटल की स्थापना पुणे में 18 नवंबर 1945 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की मौजूदगी में करवाई थी, इसलिए आयुष मंत्रालय ने 18 नवंबर को यह दिवस घोषित किया । डॉक्टर दिनशॉ के. मेहता महात्मा गांधी के कब्ज़ के रोग को प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से ठीक किया था और वहीं दूसरी तरफ योग सहायक और सहायिका राजन और पद्माजी ने यह बताया कि यह पैथी पंचमहाभूत चिकित्सा पर आधारित, ड्रगलेस( दवारहित), सर्वसुलभ, साइड इफ़ेक्ट रहित और सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति है, जो स्वचिकित्सा पर आधारित होती है और ये भारत में प्राचीन काल से सूर्य स्नान और मिट्टी स्नान, तालाब स्नान के रूप में प्रचलित है, जिनमें दस प्रमुख सिद्धांत होतें हैं इस विचार गोष्ठी में करीब 50 लोग उपस्थित थे।

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