चन्द्रावती का राजकुमार नाटक का स्थानीय कलाकारों ने किया जीवन्त मंचन
दोहरीघाट/मऊ। गोठा मे रामराज्याभिषेक के शुभ अवसर पर गोठा रामलीला नाट्य कला समिति के स्थानीय कलाकारों द्वारा महान ऐतिहासिक नाटक चन्द्रावती का राजकुमार का सफल भावपूर्ण मंचन किया गया जो काफी दर्शकों में सराहा गया । हास्य नृत्य का भी अभूतपूर्व संगम रहा।

सिंगपुर नरेश की बेटी राजकुमारी रत्ना सिह सैनिकों के साथ अपने क्षेत्र की सीमा पर टहल रही तभी दुसरे देश के चन्द्रनगर की सीमा में रंग बिरंगे फुल देखकर मोहित हो जाती है तथा सैनिकों से चन्द्रनगर की सीमा में रंग बिरंगे फुल तोडने तथा वहाँ घुमने की जीद करती है जबकि सेनापति रूप सिंह राजकुमारी को समझाता है कि ये फुल मेरी सीमा में नही हैं फिर भी उसकी राजकुमारी के आगे एक न चलती है तथा चन्द्र नगर की सीमा में जैसे ही प्रवेश कर फुल तोड़ने के लिए आगे बढती है तभी चन्द्रनगर का राजकुमार चन्दन सिंह रोकता है और कहते है कि यह हमारी सीमा में है फिर रूपसिह के सैनिकों से चन्दन सिह का युद्ध होता है चन्दन सिंह सबको घायल कर देता है तभी राजकुमारी स्वयं आकर तलवार से युद्ध करती है तथा हार जाती फिर चन्दन सिंह एकटक राजकुमारी को देखता है तभी रूप सिंह धोखे से चन्दन सिह को गिरफ्तार कर लेता है और राजकुमारी के आदेश पर चन्दन सिंह को राजकुमारी अपने पिता के दरबार मे लाती है तथा सारा दृष्टांत बताती है तभी राजा शक्ति प्रताप सिंह क्रोधित होकर पूछता है तुम कौन चन्दन सिह बताता है कि मै चन्द्रनगर के महाराज गोलोकवासी चन्द्रबदन सिह व महारानी चन्द्रावती का राजकुमार चन्दन सिंह हूँ यह सुनते ही दरबार में सबकी तलवारें म्यान से बाहर आ जाती है तभी शक्ती सिह कहता है कि तेरे पिता की हत्या मैने ही की थी यह सुनकर चन्दन क्रोधित होता है कि मुझे नही मालूम था कि मेरे पिता के हत्यारे तुम हो नही तो कभी तेरा गला काट देता फिर राजा शक्ति प्रताप सिंह क्रोधित होकर सैनिकों को आदेश देता है चन्दन को ले जाकर इसके शरीर पर कोड़े बरसाओ इसकी खाल उधेड़ दो सैनिक चन्दन सिंह को ले जाते है तथा राजकुमार रत्ना सिंह चन्दन सिंह के शरीर पर कोड़े बरसाती है फिर पूछती है तुम्हे दर्द नही होता चन्दन सिंह कहता है कि आपके हाथों से मेरे शरीर पर कोड़े नही फुल बरस रहे हैं तो फिर दर्द कैसा यह सुनते ही राजकुमारी क्रोधित होकर फिर कोडे बरसाती है तथा थक जाती है फिर चन्दन सिंह कहता है कि रूक क्यों गयी मै तो प्रेम कैदी हूँ जो आपके प्रेम में कैद हुआ हूँ ।यह सुनकर रूप सिह पागल हो उठता है वह भी राजकुमारी से मन ही मन प्रेम करता है तथा राजकुमारी के जाने के बाद चन्दन पर कोड़े बरसाता है तथा जख्मो पर नमक छिडकता है इधर राजकुमारी को चन्दन सिह से प्रेम हो जाता है तथा राजकुमारी चन्दन सिंह के पीठ पर दबे पाँव आकर लेप लगाती है तथा चन्दन सिंह से लिपट कर प्रेम का इजहार कर देती है उधर जब महारानी चन्द्रावती को जब पता चलता है कि मेरा बेटा दुश्मन की कैद में है तो वह बेचैन हो उठती है तथा राजा शक्ति प्रताप सिंह के पास सन्धि का प्रस्ताव भेजती है कि ये यो चन्दन को छोड दो नही तो युद्ध के लिये तैयार रहो शक्ति प्रताप सिंह सन्धि को ठुकराते हुए युद्ध के लिये तैयार होता है तथा जैसे ही अपने पुत्री के बारे मे जानता है कि राजकुमारी चन्दन सिंह से प्रेम कर बैठी है वह राजकुमारी को काल कोठरी में डाल देता है उधर चन्दन सिंह किसी तरह भाग जाता है तथा दोनो ओर से भयंकर युद्ध होता है अन्ततः शक्तिप्रताप सिंह की सारी सेना मारी जाती है तथा शक्तिप्रताप सिंह घायल होकर पृथ्वी पर गिर पडता है चन्दन सिह अपनी माँ से कहता है कि माँ अपने पति की हत्या का बदला चुका नंगी तलवार लिये महारानी आगे बढ़ती है तभी राजकुमारी स्वयं आकर अपने पिता के लिये प्राणदान मांगती है महारानी तलवार फेंक देती है तथा राजकुमारी को अपनी बहु बना लेती है और चलने के लिये कहती है सभी जाते है तभी पीछे से शक्ति प्रताप सिंह चन्द्रावती को मारने के लिये आगे बढता है राजकुमारी देख लेती तथा झटके में चन्दन सिंह का तलवार लेकर अपने पिता शक्ति प्रताप सिंह को घोंप देती है ।शक्ति सिंह मर जाता है ।तथा फार चन्दन सिंह व राजकुमारी का विवाह हो जाता है नाटक में मिर्जापुर बनारस से आयी नर्तकीयो ने नृत्य से समा बाध दिया नाटक का सफल निर्देशन वीरेन्द्र उपाध्याय ने किया तथा कलाकार विजय गुप्त रवि वर्मा वण्टी गुप्त रोशन राय विक्कू मनोज गोड़ सौरभ मण्टी बाबा छागुर गोदा समेत आदि लोग रहे फोटो

