कविता : तो जीवन दाता है “पिता”

( आशु कवि-के.पी.चौहान “आरजू” )
धरती मां है तो पिता आकाश है
मां की गोद में प्यार है तो
पीता दूर रहते हुए भी पास है
अगर चाहत है मां तो
पीता सबके लिए खास है
मां बेटे व परिवार की आस है
मां प्यार की बहती हुई सरिता है
पर्वत शिखर की तरह आडिग
सीर पर हाथ रखने वाले पीता है
गीत की पंक्तियां है मां के.पी.तो
कलम का आधार है पिता
माता करती है पूरी “आरजू “
