पुण्य स्मरण

सहिष्णुता, समन्वय और भारतीयता के अद्वितीय संदेश वाहक थे स्वामी विवेकानंद

– 12 जनवरी – राष्ट्रीय युवा दिवस

@ मनोज कुमार सिंह…

भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा भारतीय जनमानस के मन, मस्तिष्क और हृदय में अत्यंत प्राचीन काल से विद्यमान रही है। परंतु आधुनिक, तार्किक और वैज्ञानिक अर्थों में भारतीय राष्ट्रवाद का निर्माण और विकास ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध समेकित संघर्ष करते हुए हुआ। ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा शासित भारत में उन्नीसवीं शताब्दी में आध्यात्मिक संतों और समाज सुधारकों ने भारतीय जनमानस में जोश भरने और राष्ट्रवाद के निर्माण तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आधुनिक काल में अद्वैत वेदांत के महान प्रतिपादक, ब्रह्मज्ञानी, निर्विकल्प समाधि में अक्षर ब्रह्म का साक्षात्कार करने वाले और जीवन-मुक्त संन्यासी स्वामी विवेकानंद इन आध्यात्मिक संतों और समाज सुधारकों में अग्रपंक्तेय थे। ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा निरंतर चलाए गए दमन चक्र के फलस्वरूप हताश-निराश भारतीय जनमानस में साहस, वीरता और जोश भरने का अद्वितीय प्रयास स्वामी विवेकानंद ने किया। इसके साथ-साथ अपने संदेशों के माध्यम से उन्होंने लोगों को भारतीयता का बोध कराया।

स्वामी विवेकानंद भारत में व्याप्त हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और अन्य संस्कृतियों के सहकार, समन्वय और सहमिलन में ही असली भारतीयता का दिग्दर्शन कराना चाहते थे। वह अपनी आराधना और साधना में भी सहकार, समन्वय और सहमिलन का स्वयं प्रयोग करते थे। अपने कश्मीर प्रवास के दौरान उन्होंने अपने मुसलमान नाविक की चार वर्ष की बेटी को उमा के रूप में आराधना किया। अपनी विलक्षण आध्यात्मिक प्रतिभा से स्वामी जी ने आराध्यों में भी एकाकार स्थापित करने का अनूठा प्रयास किया। बंगाली पृष्ठभूमि में पले-बढ़े स्वामी जी काली के स्वाभाविक उपासक थे। काली को अनार्यों की क्रूर, रक्तपिपासु देवी समझकर उपहास करने वाले ईसाइयों को चुनौती देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति के प्रसार के क्रम में यही काली और उमा ईसा मसीह की माता कन्या मेरी के रूप में सर्वत्र पूजित हो रही है।

ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा किए गए आर्थिक शोषण से भारत लगातार कंगाल होता जा रहा था। इसके साथ-साथ उन्होंने भारतीय लोकमानस के मन और मस्तिष्क में बौद्धिक, तार्किक, मानसिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और सामाजिक हीनता का भाव (Inferiority Complex) भरने का सुनियोजित प्रयास किया। स्वामी विवेकानंद ने प्राचीन भारत की महान दार्शनिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक और भौतिक उपलब्धियों तथा गौरवशाली परंपराओं को स्मरण कराते हुए भारतीय जनमानस के मन और मस्तिष्क से हीनता के भाव को दूर किया। अपने ओजस्वी संदेशों, प्रवचनों और तेजस्वी व्यक्तित्व के माध्यम से उन्होंने भारतीय जनमानस में साहस, वीरता, पराक्रम, आत्मविश्वास और आत्मबल भरने का अद्वितीय प्रयास किया।

भारतीय समाज में व्याप्त अंतर्विरोधों, मतभेदों और परस्पर विरोधी दृष्टिकोणों को मिटाकर समन्वय, सहकार, साहचर्य और सद्भावना स्थापित करने में भी स्वामी विवेकानंद ने अद्भुत प्रयास किया। विभाजनकारी नीतियों को भारत में लागू करने की मंशा से ब्रिटिश साम्राज्य के पक्षपोषक चिंतकों ने भारतीय समाज को आर्य, अनार्य, द्रविड़ और कोल आदि प्रजातियों में विभाजित बताया। स्वामी विवेकानंद ने इस दृष्टिकोण का तार्किक और बौद्धिक विरोध किया और जोरदार तर्क दिया कि पश्चिमी दुनिया के लोग मानते हैं कि जब मानव का विकास बंदरों से हुआ है, तो मनुष्य का आर्य, अनार्य, द्रविड़ और कोल आदि प्रजातियों में विभाजन अतार्किक और अमानवीय है।

ज्ञानयोगी और अनासक्त कर्मयोगी स्वामी विवेकानंद ने सम्पूर्ण जनमानस के हृदय में भारतीयता का विचार (Idea of India) भरने का अद्वितीय प्रयास किया। उन्होंने पाश्चात्य विचारों के निरंतर बौद्धिक, वैचारिक और सांस्कृतिक हमलों से टूटते-बिखरते भारतीय समाज को संकल्पित भाव से संगठित किया।

स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व ओजस्वी, तेजस्वी, शक्तिशाली और युवा हृदयों के लिए अनुकरणीय था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे, “जब विवेकानंद को पढ़ते और समझते हैं तो संघर्ष करने का साहस और राष्ट्रप्रेम हजार गुना बढ़ जाता है।” गुरुवर रवींद्रनाथ टैगोर मानते थे कि अगर भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानंद के कार्यों को पढ़ना और समझना चाहिए। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस स्वामी जी के व्यक्तित्व और शिक्षाओं से गहरे प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे।

रामकृष्ण परमहंस के परमप्रिय शिष्य, रामकृष्ण मिशन के संस्थापक, अद्वैत वेदांत के निष्णात भाष्याकार, महान कर्मयोगी, दुःखित-दलित-शोषित के उद्धारक, हताश-निराश जनमानस में साहस, निडरता, आत्मबल और आत्म गौरव भरने वाले स्वामी विवेकानंद को उनकी जयंती पर देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

लेखक/साहित्यकार/उप-सम्पादक, कर्मश्री मासिक पत्रिका

 

 

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