भय का है भूचाल, बेटियाँ बचा लो साहब
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय से बहुभाषी लोक गायिका, कवयित्री व टीवी कलाकार विजया भारती की वर्तमान में देश के अंदर बेटियों के हालात पर शब्दों के माध्यम से अपील
भय का है भूचाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
जन-जन है बेहाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
भारत के कोने-कोनों में
नरभक्षी, विकृत, श्वानों ने
नर्क बनाकर रख डाला है
कर डाला बदहाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
बना हुआ माहौल डरावन,
है माखौल क्या स्त्री-जीवन,
अपने ही घर मे असुरक्षित,
बिछे हैं चहुँ दिशि जाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
नोच-नोच कर खा जाते हैं,
जिंदा उन्हें जला जाते हैं,
विह्वल,उत्तेजित हैं सारे,
कब तक हो ये हाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
नन्ही जानें,बेटी-बहनें,
कैसे असुरों को पहचानें,
भूखे भेड़िये ओढ़े बैठे,
इंसानों की खाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।
बेटी की माँ कैसे सोये,
यूँ ही भ्रूण हत्यायें होए,
विश्व-फलक पर नहीं हिन्द का,
बने कलंकित भाल,
बेटियाँ बचा लो साहब।।

