चर्चा में

कहीं यूपी का बंटवारा कर पूर्वांचल और बुंदेलखंड राज्य तो नहीं बनाने जा रही भाजपा ?

■ यूपी में या 1/3 या 50-50 के प्लान की बदौलत 2022 की तैयारी तो नहीं ?

( आनन्द कुमार )

जैसे-जैसे 2022 का साल नजदीक आता जा रहा है, वैसे- वैसे उत्तर प्रदेश के सियासत का तापमान ऊंचा और नीचा होता जा रहा है। दिल्ली की सियासत में जब भी कोई प्रधानमंत्री बनता है या जिसकी सरकार बनती है उसमें यूपी का रोल काफी मायने रखता है। ठीक उसी प्रकार यूपी की सियासत देश की सियासत पर मायने रखती है। देश की गद्दी पर आसीन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और उत्तर प्रदेश की गद्दी पर आसीन योगी आदित्यनाथ किसी भी हालत में यूपी से अपनी राजनीतिक पकड़ को कमजोर नहीं करना चाहते हैं। ऐसे में जिस प्रकार से यूपी में अंदर ही अंदर भाजपा खेमे में सियासत हो रही है उसको समझ पाना विपक्ष के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है, लेकिन इतना तो तय है कि जब भारतीय जनता पार्टी अपने राजनीति के पिटारे से इस सियासत के चाल को चलने की कोशिश करेगी तो विपक्षी पहले तो डगमगाएंगे, और अगर संभल कर सूझबूझ का गुणा गणित किए तो भाजपा के लिए नई चाल भारी भी पड़ सकती है। लेकिन यह तो भविष्य की बात है।

आइए हम आपको बताते हैं कि यूपी के नए राजनीतिक घटनाक्रम में क्या हो सकता है। दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अम्बरीष राय अपने फेसबुक वाल पर लिखते हैं कि “पता नहीं क्यों लेकिन लग रहा है कि पूर्वांचल राज्य गर्भ ले चुका है” उनकी एक लाइन की ये बात काफी मायने रखती है और भाजपा के अंदरखाने भाजपा के चुल्हे पर पक रही सियासी खिचड़ी का स्वाद बताने के लिए काफी है। क्योंकि यूपी का जो हाल है और कोरोना कॉल में पूरे देश में भाजपा ने जो अपना सिस्टम को अपनाया है उसको देखकर तो ऐसा ही लगता है कि यूपी की गद्दी पर बैठना भाजपा के लिए इतना आसान नहीं होगा। ऐसे में राजनीति के अलग ट्रेक पर चलने वाले प्रधानमंत्री मोदी और उनके चाणक्य अमित शाह का यह मास्टर माइंड प्लान सोने पर सुहागा भी साबित हो सकता है। अगर कोई टेक्निकल पेंच न फंसे और भाजपा के दिग्गज संसद के इसी सत्र में अगर यूपी का बंटवारा कर पूर्वांचल और बुंदेलखंड राज्य बनाने की कवायद करते हुए भाजपा के दो नए चेहरों को मुख्यमंत्री का पद सौंपते हैं तो इतिहास बनाने के बाजीगर नरेन्द्र मोदी भारत के सबसे ज्यादा राज्यों के प्रधानमंत्री बनने वाले पहले पीएम साबित होंगे।
साथ ही इस बंटवारे से जहां यूपी की सियासत में ऐसा तूफान आ जाएगा कि राज्य छोटे-छोटे होने से विकास की सतही बात जनता को समझाकर भाजपा अपने पक्ष में करने में कामयाब हो सकती है। साथ ही अगर इसी सरकार में बंटवारा कर मुख्यमंत्री बनाती है तो भाजपा को 03 मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिल सकता है। जिसमें दो नये मुख्यमंत्री बनाकर दो जातियों की बदौलत भाजपा सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में सियासत का वह ककहरा पढ़ा देगी की अनपढ़ भी पढ़ जाएगा। हो सकता है कि संसद के इसी शीतकालीन सत्र में 2022 के चुनाव के पहले भाजपा पूर्वांचल राज्य और बुंदेलखंड का बंटवारा कर दे और इसके साथ साथ यूपी की गद्दी योगी आदित्यनाथ के पास रहने दे तथा पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर ऐसा तीर चलाए कि विपक्ष को लगे भी ना और भाजपा का काम भी बन जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *