रचनाकार

अपनी प्रिय अभिनेत्री मधुबाला के नाम कुछ शब्द

ओमा The अक्©

समन्दर का सारा नीलापन आकाश पर बिछा था…
आकाश शान्त था..
की शफ़क़-शफ़क़ क़दमो के निशान उफ़क़ पर दिखने लगे…
शाम की लटें बिखराए…
चांदिनी को वक्ष पर लपेटे…
बेतहाशा भागती जा रही थी—
सौन्दर्य की देवी “वीनस”….
उफ़क़ पार…
इन्तिज़ार में था “एडोनिस”…
वीनस का महबूब…
प्रेम का देवता…
वीनस को उसके आलिंगन की खोज थी…
बेख़ुद-वीनस को भागते हुए यह भी ध्यान न रहा की…
की बादल-बादल काटें उगे हुए हैं…
उफ़्फ़ ! ये कांटा…
और अचानक से एक कांटा..
सौन्दर्य की देवी के पाँव के अंगूठे में जा चुभा..
एक वेदना हुई..
और टपक पडा लहू का एक क़तरा…
सौन्दर्य की वेदना से टपका ये लहू…
बन गया महकता हुआ क़िस्सा…
प्रेमगाथाओं का अटूट हिस्सा…
महबूब की आँखों का ख़्वाब…
नाज़ुक-सुर्ख़-ग़ुलाब…

बस तब से ये कोमल सा फूल..
कहता है अपनी महक़ की ज़ुबानी…
दिले-आशिक़ की बेचैन कहाँनी…
तबसे ग़ुलाब है–
“वासना की वेदना का प्रतीक”….!!

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