किड्स केयर इंटरनेशनल स्कूल के नौनिहालों ने राधा-कृष्णा का रुप धारण कर मन मोहा

मऊ। किड्स केयर इंटरनेशनल स्कूल अदरी मोड़ मऊ पर नौनिहालों ने जन्माष्टमी के अवसर अलग-अलग वेशभूषा में राधा-कृष्णा का रुप धारण कर श्रीकृष्ण की सुन्दर झांकी का चित्रण किया। इसके पूर्व विद्यालय परिवार ने विधि विधान से पूजा अर्चन कर राधा कृष्ण की मूरत की सुंदर झांकी भी सजाई। छोटे छोटे मासूम बच्चों को कृष्ण के जन्म से जुड़ी कहानी स्कूल की प्रिन्सिपल लघुता सिंह ने सुनाते हुए कहा कि जब भगवान श्री कृष्ण ने नव पृथ्वी में जन्म लिया, एक चमत्कार सा हुआ, जेल के दरवाजे अपने आप खुल गये, रक्षक सो गए और एक छिपी हुई आवाज ने कृष्ण को बचाने के रास्ते के बारे में वासुदेव को बताया। वासुदेव ने कृष्णा को एक छोटी सी टोकरी में ले लिया और अंधेरे में मध्यरात्रि में एक बड़ी नदी से, गोकुल में अपने दोस्त नंद के पास ले गए। श्रीमती सिंह ने कहा कि उन्होंने भारी बरसात की रात में पार किया जहां शेषनाग ने अपना फन फैलाकर कन्हैया की मदद की। उन्होंने अपने बेटे को अपने दोस्त (यशोदा और नंद बाबा) की लड़की के साथ बदला और कंस की जेल वापस लौट आये। सभी दरवाजे बंद हो गए और कंस को संदेश भेज दिया गया कि देवकी ने एक लड़की को जन्म दिया था।
कंस आया और उस लड़की को पटक कर मारने की कोशिश की, उसी समय वह लड़की कंस के हांथों से अदृश्य हो कर आकाश में अपने असली रूप बिजली कन्या के रूप में प्रकट हुई और उसने चेतावनी दी और कहा – अरे मुर्ख कंस तुम्हारा हत्यारा तो बहुत सुरक्षित जगह पर बढ़ रहा है और जब भी तुम्हारा समय पूरा हो जाएगा, तब वो तुम्हारा वध कर देगा।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण, भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे। यशोदा और नंद के सुरक्षित हाथ में गोकुल में बाल कृष्ण धीरे-धीरे बढ़ रहे थे। बाद में उन्होंने कंस की सभी क्रूरता को समाप्त कर दिया और कंस की जेल से अपने माता-पिता को मुक्त कर दिया। कृष्ण की विभिन्न शरारती लीलाओं से गोकुलवासी बहुत खुश थे। गोकुल में रहने वाले लोग इस त्योहार को गोकुलाष्टमी के रूप में मनाते हैं।
इस अवसर पर पुण्य, आरम्भ, अनाया, अर्चना, ख़ुशी, रुद्राक्ष, आस्था, रीशाक, अनमोल, वैशनवी, वैभव, दीपशिखा, भूमि, अंकित, रामेंद, कशिका, देवांश, हर्ष राज, अरंव पांडाय, आशि, इवान, हार्दिक,श्लोक आदि बच्चे रहे।



