बाहरी प्रत्याशी के चलन की बदौलत! क्या मऊ की नेतागिरी को बांझ बनाकर छोड़ेंगे हर दल वाले!

@ आनन्द कुमार…
■ मऊ! भाजपा का चार में तीन टिकट फाइनल, दो प्रत्याशी गैर जनपद से
■ सपा के दारा सिंह चौहान व सदर से मोख्तार भी हैं बाहरी
■ घर की अनदेखी, कहीं कर न दे अनहोनी
■ बसपा बाहरी अतुल कुमार सिंह को पहले ही बना चुकी है सांसद
मऊ। इसे खराब किस्मत कहें या राजनीति का बनता बिगड़ता दस्तूर कि हर बार मऊ के नेता ही क्यों छले और सताए जाते हैं। आखिर यह प्रथा कब तक और क्यों चलती रहेगी। इस पर विराम राजनैतिक दल लगाएंगे या इस चलन की बदौलत वे मऊ की राजनीति में यहां के नेतागिरी को बांझ बनाकर छोड़ेंगे। जबकि अभी ज्यादा से ज्यादा राजनीति का फोकस मोदी, योगी, अखिलेश और मायावती के इर्द-गिर्द घुम रहा है तो फिर आखिर ऐसा क्यों ?
क्या मऊ के नेता सिर्फ भाजपा, सपा व बसपा के ध्वजवाहक, गगनभेदी नारों के हुंकार कर्ता या फिर लोगों के बीच अपने-अपने दल के लिए लड़ने, झगड़ने व समझाने के लिए बने हैं, आखिर ऐसा कब तक?
खैर इन फैसलों में दल के शीर्ष नेतृत्व और मऊ के नेता दोनों बराबर के जिम्मेदार हैं। जनता यहां कम दोषी है। वह तो विरोध कर भी लेती है, लेकिन जिसका हक कोई मार रहा है वह ही मौन साध लेगा और अपने मुखिया की बनती तस्वीर देखेगा और अपनी बिगड़ती तकदीर पर चुप रहेगा तो कोई क्या करेगा।
भारतीय जनता पार्टी परिवार वाद का बहुत ही मुखर होकर विरोध करती है, लेकिन परिवार वाद के चक्की में खुद पिसती नजर आती है। रविवार की रात्रि जारी हुई सूची में पार्टी ने मऊ जनपद में फिर दो बाहरी प्रत्याशी, मधुबन से रामविलास चौहान को टिकट देकर परिवार वाद को बढ़ावा दिया है। रामविलास बिहार के राज्यपाल फागू चौहान के पुत्र हैं। इसके अलावा मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट वर्तमान विधायक श्रीराम सोनकर को पुन: उम्मीदवार बनाकर बाहरी को मौका देकर, मऊ के स्थानीय नेताओं का हक मारने की कोशिश की है।
वहीं समाजवादी पार्टी ने घोसी सीट पर दल बदल कर, पड़ोसी जनपद आजमगढ़ से आए दारा सिंह चौहान को प्रत्याशी तो बनाया ही है सहयोगी दल के सहारे मऊ सदर से बाहुबली मोख्तार अंसारी को वाकओवर देकर बाहरी प्रत्याशी का सम्मान व अपने कार्यकर्ता का अनदेखी कर रही है जो ठिक नहीं है।
मऊ बनाम बाहरी के मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी भी अछूती नहीं है, वे पहले ही गैर जनपद के अतुल कुमार सिंह (अतुल राय) को हाथी के सहारे सांसद बना चुकी है। सदर विधायक मोख्तार भी उसी के सिंबल पर पांचवी बार सदन पंहुचे थे।
आखिर मऊ के नेताओं के साथ राजनैतिक दलों के आका उनके हक व अधिकार पर डाका डाल कब तक दूसरों को पंजीरी बांटते रहेंगे। बाहरी ही नेता को लड़ाना है तो किसी बड़े नेता को लड़ाते, ताकि कुछ उम्मीद बंधती कुछ सपने पूरे होते। कहीं बड़े नेताओं को घर की अनदेखी, कोई अनहोनी न कर दे।


