अमर-स्मृतिशेष : वह एक समय में भारतीय राजनीति का चाणक्य था…!
“इस खित्ताए आज़मगढ़ पे, फै़जाने तजल्ली है यक्सर/ जो ज़र्रा यहाँ से उठता है, वो नैय्यर-ए-आज़म होता है.” @ अरविंद
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“इस खित्ताए आज़मगढ़ पे, फै़जाने तजल्ली है यक्सर/ जो ज़र्रा यहाँ से उठता है, वो नैय्यर-ए-आज़म होता है.” @ अरविंद
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