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प्रत्येक मनुष्य के जीवन में गुरु का बहुत बड़ा योगदान : स्वामी भवानीनन्दन

गाजीपुर। जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व आदर्श है। व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा अंधविश्वास के आधार पर नहीं बल्कि श्रद्धाभाव से मनाना चाहिए। गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। उक्त बातें शुक्रवार को गुरुपूर्णिमा के पर्व पर शिष्य श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने कहा गाजीपुर जनपद स्थित हथिराम मठ पर भक्तों व श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कही।

गुरुपूर्णिमा पर्व के अवसर पर अपने ब्रह्मलीन गुरु महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति का पूजन अर्चन के माध्यम से उन्होंने गुरुपूजा कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। उसके बाद अपने शिष्यों को आशीर्वचन करते हुए कहाकि हिन्दू धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में गुरु का बहुत बड़ा योगदान होता है। कहते है गुरु के आशीर्वाद से मनुष्य अपने जीवन के कठिन से कठिन समय को पार कर लेता है। गुरु के इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हमारे शास्त्रों में एक दिन उनके नाम किया है जिसे गुरुपूर्णिमा कहा जाता है।
आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्‍यास का जन्‍म हुआ था। महर्षि के सम्‍मान में इसे गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। भारतवर्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी। सिख धर्म केवल एक ईश्वर और अपने दस गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानता है। आज ही 27 जुलाई को 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण पड़ने जा रहा है।
आषाढ़ की पूर्णिमा का अर्थ है कि गुरु तो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह हैं जो पूर्ण प्रकाशमान हैं और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह, आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है जैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हों। शिष्य सब तरह के हो सकते हैं, जन्मों के अंधेरे को लेकर आ छाए हैं। वे अंधेरे बादल की तरह ही हैं. उसमें भी गुरु चांद की तरह चमक सके, उस अंधेरे से घिरे वातावरण में भी प्रकाश जगा सके, तो ही गुरु पद की श्रेष्ठता है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है,  इसमें गुरु की तरफ भी इशारा है और शिष्य की तरफ भी। यह इशारा तो है ही कि दोनों का मिलन जहां हो, वहीं कोई सार्थकता है।
इस अवसर पर डॉ रत्नाकर त्रिपाठी, सन्त अभयानन्द, विधायक वीरेंद्र यादव, अखिलेश्वर राय, शिव कुमार राय, भाजपा जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, पूर्व प्रदेश मंत्री प्रभुनाथ चौहान, आनंद शंकर सिंह, जगदीश सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, केडी सिंह, राजेंद्र सिंह, विपिन कुमार पांडेय, विपिन कुमार सिंह, शारदानन्द राय “लुटूर राय”, मेजर इंद्रजीत सिंह, कर्नल आर पी सिंह सोमनाथ सिंह, रमेश यादव सहित गाजीपुर जनपद के साथ ही जनपद के साथ ही आज़मगढ़, बलियां, जौनपुर, चंदौली, सहित विभिन्न जनपदों से हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

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