स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रशिक्षण से जीवन जीने की कला आ जाती है : सुषमा जायसवाल
■ सिल्वर बेल्स स्कूल में तीन दिवसीय स्काउट / गाइड प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
चकिया / चंदौली । स्काउट्स एवं गाइड्स एक स्वयंसेवी, गैर-राजनीतिक, शैक्षिक आंदोलन है। इसके प्रशिक्षण से जीवन जीने की कला आ जाती है। उक्त उद्गार सिल्वर बेल्स स्कूल की सचिव सुषमा जायसवाल बुधवार को विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय स्काउट गाइड प्रशिक्षण शिविर में व्यस्त कर रहीं थीं।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण नव जवानों को मानवता की सेवा करने का मौका प्रदान करता है वह भी बिना किसी भी तरह के रंग, मूल अथवा जाति भेद के। यह आंदोलन अपने लक्ष्यों, सिद्धांतों एवं विधियों के आधार पर कार्य करता है। स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रशिक्षक द्वय महेन्द्र कुमार व रतन जायसवाल ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के दौरान इसके व्यापक महत्व के बारे में जानकारी दी। कहा कि 1907 में लार्ड बेडेन पॉवेल द्वारा इसकी स्थापना की गई थी जिसका उद्देश्य बच्चों की पूर्ण शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक क्षमताओं का विकास करना है ताकि वे एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी क्षमताओं के द्वारा स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना योगदान दे सकें। इसके पूर्व विद्यालय के डाइरेक्टर प्रभात जायसवाल व सचिव ने झंडोत्तोलन के पश्चात मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व द्वीप प्रज्जवलित कर शिविर का शुभारंभ किया। इस मौके पर रमेश चंद्र भगत, पुष्पा भगत, सिद्धार्थ जायसवाल, अनुपमा अग्रवाल, आर के सर, सोनम जायसवाल के अलावा अशोक जायसवाल उपस्थित रहे।

