मैं स्त्री, किस किस से लड़ू मैं…
मैं और मेरे एहसास
@शालिनी राय…
मैं स्त्री, किस किस से लड़ू मैं,
भादो से लड़ूं तो सावन रूठ जाता है, पतझड़ से लड़ूं बसंत छूट जाता है,
गर लड़ लूं उदासियों से,
तो शोर रूठ जाता है,
लड़ लूं ससुराल से,
तो मायका भी छूट जाता है,
किस-किस से लडू मैं…..
रात के स्याह पहरों से लड़ू,
तो दिन का उजाला रूठ जाता है,
कह दूं अगर मन की अभिलाषा तो रीति रिवाज़ टूट जाता है,
कुरीतियों कुप्रथाओ से लड़ूं,
जग प्यारा छूट जाता है,
किस किस से लड़ूं मैं…
अगर सिसकियों से लड़ूं तो
अश्रु धारा रूठ जाता है,
कह दूं अगर साफ-साफ कोई बात
तो कई रिश्ता टूट जाता है,
आख़िर किस किस से लड़ूं मैं….


