रचनाकार

पहलगाम: मानवता के दुश्मन

@ राजेश सिंह…

अपना रंग दिखाया तूने फिर से,
रक्त रंजित किया पहलगाम को,
मानवता को कलंकित करके,
दूषित कर्म से लाल किया वैसरन को,
मानवता को फिर शर्मसार किया,
फिर खून से अपना हाथ लाल किया,
तुम हो दुश्मन मानवता के,
अपनी आदतों से हो परेशान तुम,
विचित्र सोच के इंसान तुम।

निहत्ते सैलानियों पर वार करना ,
यह भी कोई बात है ?
खुशियों का गला घोटना,
यह कहाँ की बात है ?
लेकिन तुमको कौन कहे ,
तुम अपनी काली सोच में ही निराले हो,
तुम तो विचित्र सोच वाले हो ।

है नहीं अपनो की चिंता तुम्हें ,
सबको कंगाल किये चल रहे ,
लोग दाने-दाने को परेशान हैं ,
लेकिन तुम तो आतंकवाद के सरताज हो।
परमाणु बम की डुगडुगी बजाते फिरते हो,
किसको क्या कहना है इसका भी भान नहीं,
प्रधानमंत्री रक्षामंत्री की बात रेल मंत्री भी बोलता है,
तुम तो विचित्र सोच वाले हो ।

अपनी असफलताओं को ढकने के लिए ,
जनता का ध्यान बंटाते हो,
क्या यही निदान है तुम्हारी समस्या का ?
क्यों आतंकवाद को पालते हो ?
क्यों मौत को दावत देते हो ?
क्या है तुमको यह भान नहीं ?
भोली-भाली जनता का तूने विश्वास खोया है ।
तुम्हारी नीतियां ही तुमको,
अपनों में ही बाटने वाली हैं ,
जल्द ही तुम खंडित होगे,
अब इसी की बारी है ।
लेकिन तुमको कौन कहे ,
तुम तो विचित्र सोच वाले हो।

हम कभी नहीं ग़लती करते,
बसुधैव कुटुम्बक को लेकर चलते हैं।
लेकिन जब सांप कोई फन उठता है,
उसको कुचलने का मन हो आता है ।
क्या 1965, 1971, 1999 व पुलवामा की

प्रतिक्रिया तुम भूल गए ?
क्या अभिनंदन को भूल गए ,
चिंता होती तुम्हारी बौद्धिक क्षमता पर ,
तुम विचित्र सोच वाले हो ।

बाइस अप्रैल के हमले से ,
अपने देश की भावनाओं में भूचाल आया है ,
मोदी, अमित शाह, राजनाथ व जयशंकर

डभोल सीडीएस सभी का तेवर देख ,
पड़ोसी में बौखलाहट आया है ,
मिल रहा है हमें वैश्विक समर्थन ,
जो हमारे हौसले बढाती है,
हम सदैव याद रखेंगे इस समर्थन को ,
यही तो हमारी थाती है ।

इस बार तूने बड़ी ग़लती कर डाली है ,
अब तो तुमको दंड मिलेगा ,
मौका नहीं अब चंद मिलेगा ,
मोदी की घोषणा से ,
अब तुम्हारा विनाश लिखा है ।
हो जाओ तैयार झेलने को,
अब तो तुम्हारा सत्यानाश लिखा है ।।

राजेश सिंह
मऊ ,उत्तर प्रदेश
9415367382

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