गीता प्रेस और गाँधी शान्ति पुरस्कार 2021 –
@ राजेश सिंह…
स्वतन्त्र स्तम्भकार
29 अप्रैल 1923 में विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ महान गीता के मर्मज्ञ यवं व्यवसायी जगदयाल गोयन्दका, घनश्याम दास जालान और हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा स्थापित गीता प्रेस, जिसका मुख्यालय गोरखपुर, उत्तरप्रदेश में है और जो किसी प्रकार के सरकारी सहयोग एवं विज्ञापन आदि के बिना, स्वतंत्रता पूर्वक अपने सनातन उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध होकर न केवल भारत मे वरन सम्पूर्ण विश्व मे सर्वाधिक धार्मिक पुस्तकों का मुद्रण एवं प्रकाशन जनकल्याण एवं विश्व शांति हेतु करता है को, 2021 का ‘गांधी शांति पुरस्कार ‘हेतु भारत सरकार द्वारा चयन निःसन्देह भारतीय प्राचीन गौरवशाली संस्कृति को सम्मान देने वाला है।
इस पुरस्कार से गीता प्रेस का मनोबल बढ़ेगा और वह और अधिक क्षमता व प्रयास के माध्यम से, परिवारिक मूल्यों , जीवन मूल्यों ,नैतिक मूल्यों ,सामाजिक मूल्यों , संवैधानिक मूल्यों ,सनातनी मूल्यों आदि की रक्षा के साथ-साथ पारम्परिक भारतीय सनातनी संस्करों का भाव प्रेषण अपनी धार्मिक व संस्कारिक पुस्तकों के माध्यम से जनता में करने का प्रयास करेगा।

प्राचीन काल मे जब लिपिबद्ध कानून नहीं था श्रुतिपरम्परा से अर्जित ज्ञान के माध्यम से इन धार्मिक ज्ञान ने पाप – पूण्य की अवधारणा से समाज को विनियमित करने का कार्य किया । इसी परम्परा से कालांतर में लिपिबद्ध ग्रन्थों ने समाज को दिशा का दिखाई । आधुनिक काल में गीता प्रेस इसी के वाहक की भूमिका में लोकप्रिय है ।
सूचना के अनुसार गीता प्रेस अपने लगभग 18 थोक केंद्रों व 42 प्रमुख रेलवेस्टेशनों के अपने वितरण केंद्रों के साथ हजारों अन्य पुस्तक वितरण केंद्रों के साथ अपनी पुस्तकों को उपलब्ध करता रहा है। विशेषता यह भी कि इसके प्रकाशन में किसी भी जीवित व्यक्ति की फ़ोटो व विज्ञापन नहीं होता जो अपने आप मे अद्वितीय है । इसके बावजूद इनकी पुस्तके अपनी लागत से 40 से लेकर 90 प्रतिशत कम मूल्य पर जनजागरण हेतु उपलब्ध रहती हैं जो न केवल अन्य सम्बंधित लोगों के लिए अनुकरणीय वरन प्रेरणाप्रद भी है।
हिन्दुधर्म के आराध्य मर्यादापरुषोत्तम श्रीराम के जीवन चरित्र की पूर्ण जानकारी यह अपने विश्वप्रसिद्ध ग्रन्थ ‘रामचरितमानस’ के माध्यम से सम्बंधित धर्म के अनुयायियों व जनसामान्य के बीच प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार हिन्दू धर्म के आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच महाभारत के युद्ध के बीच हुआ नीतिगत संवाद जिसका संकलन ‘श्रीमद्भवतगीता’ के रूप में किया गया है, को भी हिन्दू धर्मप्रेमी व जनसामान्य के बीच प्रस्तुत करता है। हिन्दुधर्म में महाकाब्य ‘महाभारत ‘ व ‘रामायण ‘ आदि ग्रन्थों का प्रमुख स्थान है। यह ग्रन्थ लगभग सभी सनातन मतावलंबियों के परिवार में अवश्य होतें हैं और अधिकांश लोगों द्वारा पढ़े व अनुकरण किये जाते है। जिससे समाज में धार्मिक व नैतिक मूल्यों को परोक्ष रूप से स्थापना में मदद मिली है।
गीता प्रेस अनेक हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों ,टिकाओं के साथ कुछ मासिक पुस्तकों जैसे ‘कल्याण’ आदि का भी प्रकाशन करता है जो जनसामान्य में बहुत लोकप्रिय हैं। यह लगभग 15 भाषाओं में अपनी विभिन्न धार्मिक व मासिक पुस्तकों का अविरलगति से मुद्रण व प्रकाशन करता रहा है। जिनमें हिंदी ,संस्कृत,मलयालम, तमिल, असमिया, गुजराती, बंगाला ,उड़िया, कन्नड़ ,मराठी,अंगेजी ,नेपाली,गुरमुखी,ऊर्दू प्रमुख हैं। जिससे परिणामस्वरूप इसका प्रसार क्षेत्र व पाठक वर्ग बहुत व्यापक हो जाता है।
ऐसी स्थिति में जब गीता प्रेस का स्थान विश्व के सर्वाधिक बड़े मुद्रकों एवं प्रकाशकों में सम्मिलित हो और विश्व के सर्वाधिक प्राचीन सनातन धर्म के प्राचीन सर्वमान्य स्रोतों में इसको गरिमामयी स्थान प्राप्त हो साथ ही साथ जिसने सैकड़ो वर्षों में अविरलगति से अपने भगीरथ प्रयासों के द्वारा यह सब वैश्विक कीर्तिमान अपने प्रयासों से प्राप्त किया हो तो निश्चित रूप से वह इस ‘गांधी शांति पुरस्कार 2021’ के सर्वथा योग्य है।
गीताप्रेस अपने प्रकाशनों के माध्यम से राष्ट्र की एकता और अखंडता के साथ – साथ वैश्विक शांति एवं सहिष्णुता को बढ़ाने में अतुलनीय योगदान दिया है। हम इसके प्रयास को नमन करते हुए ‘गांधी शांति पुरस्कार
2021’ हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई प्रेषित करते हैं ।
लेखक- राजेश सिंह मऊ ,उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं और
स्वतन्त्र स्तम्भकार के रूप में विभिन्न पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं । आपका मोबाइल नंबर 9415367383 है ।


