रचनाकार

नमन मऊ के लाल सुधाकर…

— राजेश कुमार सिंह

नमन मऊ के लाल सुधाकर,
हम सब के सम्मान सुधाकर।
मऊ धरा पर जन्म लिया,
जन-जन की पहचान सुधाकर।।

भावनपुर की माटी बोले,
आशाओं का मान सुधाकर।
अपनों के स्वाभिमान बने,
हर दिल की अरमान सुधाकर।।

राजनीति की आन सुधाकर,
पूर्वांचल की शान सुधाकर।
जन-जन के स्वाभिमान बने,
मऊ की पहचान सुधाकर।।

कुलदीप के पुत्रों में आप,
सद्गुणों से परिपूर्ण थे आप।
सुधा, दया के स्रोत बने,
अपनों की हर उम्मीद थे आप।।

संघर्ष पथ के वीर पथिक,
निडरता के प्रतिमान थे आप।
किशोर अवस्था में ही आपने,
संघर्षों को पहचान दिया।।

घोसी, काशी, आज़मगढ़ में,
छात्र राजनीति में नाम किया।
अपनों का मान बढ़ाया आपने,
हर कदम पर उत्थान किया।।

चौधरी चरण सिंह के विचार,
चंद्रशेखर की राह लिए।
मुलायम के शिष्य बनकर,
समाजवाद को साथ जिए।।

शिवपाल के सखा बने आप,
दीन-दुखियों के रक्षक थे आप।
दल-विघटन के कठिन समय में,
मुलायम संग अडिग रहे आप।।

अवसरवाद के इस युग में भी,
डिगा नहीं घोसी का लाल।
आजीवन समाजवाद निभाया,
सिद्धांत बने आपकी ढाल।।

नत्थूपुर–घोसी विधानसभा में,
आपने इतिहास रचा।
उपचुनाव घोसी में भी,
कीर्तिमान नया लिख डाला।।

संघर्षों की मिसाल बने,
पूर्वांचल की आवाज़ थे आप।
मऊ की राजनीति में सदैव,
जननायक, सम्राट थे आप।।

नमन मऊ के लाल सुधाकर,
हम सब के सम्मान सुधाकर।


मऊ, उत्तर प्रदेश

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