रचनाकार

“रक्षा-बंधन”

( किशोर कुमार धनावत )

गीत खुशी के गाता है,
रक्षा-बंधन त्योहार।
अपने संग लाता है,
झोली भर उपहार।

राखी के धागे में बंधा,
भाई-बहन का प्यार।
देखते ही जुड़ जाते,
मन से मन के तार।

याद दिला देता है ये,
बचपन का दुलार।
रिश्तों का मिठा स्वाद,
करता है मनुहार।

सभी भाईयों बहनों को समर्पित
💐🌹💐🌹💐
रचनाकार:-किशोर कुमार धनावत,
रायपुर, २१-८-२०२१

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