PM के आह्वान पर मल्टीनेशनल कंपनियों के ब्रांडेड आटा से टक्कर लेता “लोकल बने वोकल”
● RO पानी से धुले, घर जैसी सफ़ाई के साथ मोटे दाने गेंहू से तैयार गंगाभोग फ्रेसचक्की आटा बन रही गृहणियों की पहली पसंद
(श्रीराम जायसवाल)

मऊ। वैश्विक महामारी कोरोना कॉविड के झंझावात में जूझ रहे समूचे विश्व में जनमानस के साथ ही अर्थ जगत को भी काफी चोट पहुंची है। जिनसे उबरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकल बने वोकल का नारा बुलंद किया गया। प्रधानमंत्री के इन नारे को लघु एवं स्थानीय उद्यमियों ने एक वाक्य सूत्र मानकर अर्थ जगत में आई मंदी से लड़ने को कमर कस लिया। ऐसे में जनपद के औद्योगिक क्षेत्र स्थित आटा मिल संचालक ने आटा मिल में मूलभूत बदलाव के माध्यम से आधुनिकीकरण कर मल्टीनेशनल ब्रांडेड पैकेट बंद आटा के स्तर का आटा बाजार में उतार कर प्रधानमंत्री के वाक्य सूत्र को चरितार्थ करने का काम किया है।
गौरतलब होगी 2004-05 से औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर में गंगा भोग आटा की स्थापित इकाई से बन रहे आटे की सप्लाई मूलतः बलिया के साथ ही पड़ोसी प्रांत बिहार के आरा, भोजपुर, बिहिया, बिहिटा, बक्सर के बाजारों में बहुतायत मात्रा में मांग रहती है। आटा मिल संचालक द्वारा आटा में गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए गेहूं खरीदारी के समय ही विशेष ध्यान दिया जाता है। मोटे दाने के स्वस्थ गेहूं की खरीदारी से लेकर साफ-सफाई तक पर पूरा नजर रखते हुए पैकेजिंग तक गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए काफी मेहनत किया जाता है। ऐसे में आटा धुलाई के लिए ऑटोमेटिक आरो प्लांट की स्थापना कर लोकल आटा इकाइयों के मामले में एक कीर्तिमान स्थापित करने का काम किया है।
विशेष जानकारी देते हुए गंगा भोग आटा मिल संचालक कन्हैया लाल जायसवाल ने बताया कि लगभग 15 वर्षों से लगातार गुणवत्ता युक्त साफ और घर जैसा आटा के उत्पादन के बाद बाजारों से मिल रहे प्रतिक्रिया से लगातार उत्साहवर्धन होता रहा है। ऐसे में गेहूं की धुलाई के लिए आरो प्लांट का स्थापना कर मल्टीनेशनल ब्रांडेड आटा से टक्कर लेने का काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा करते हुए कहाकि विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों के आटे से लगभग 20 से 25% कम मूल्य पर उपलब्ध होने वाला उनका आटा सबसे बेहतर व गृहणियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। बताया कि स्थानीय स्तर पर लगभग दर्जन भर लोगों द्वारा आटा मिल संचालित किया जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद मल्टीनेशनल कंपनियों से टक्कर लेने के लिए आरओ प्लांट की स्थापना के साथ ही निरन्तर बेहतर साफ-सफाई के लिए आधुनिक उपकरण लगाकर उन्होंने लोकल बने वोकल पर अमल करने का काम किया है।
