NBAIM के वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मजीव आधारित जैविक एवं उन्नत कृषि पद्धतियों के बारे में मऊ के किसानों को किया जागरूक
मऊ। राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो, कुशमौर, मऊ के तत्वाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित DST-SSTP परियोजना के अंतर्गत दिनांक बृस्पतिवार को से ग्रामसभारू खेरा मोहम्मदपुरए जनपद मऊ के प्राथमिक विद्यालय में एक कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ब्यूरो की प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना अन्वेषक डॉ रेनू और सह अन्वेषक प्रधान वैज्ञानिक डॉ पवन कुमार शर्मा एवं वैज्ञानिक डॉ आदर्श ने भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से गाँव के 125 से अधिक किसानों जिसमें 50 से करीब महिलाएं भी शामिल थीं को फसल उत्पादन हेतु खेती में प्रचलित परंपरागत रासायनिक गतिविधियों से अलग सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर आधारित जैविक एवं उन्नत तौर.तरीकों पर व्यापक रूप से विचार विनिमय और इन पद्धतियों से होने वाले लाभों पर चर्चा की गयी।
डॉ रेनू ने जानकारी दी की मऊ जनपद के लिए इस परियोजना सञ्चालन का ब्यूरो में पिछले ढाई वर्षों से किया जा रहा है जिसमें कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को सूक्ष्मजीव और अन्य पौध.उत्पादों पर आधारित खेती के लाभों से परिचय करना और उनका कृषि में उपयोग करने के लिए प्रेरित करना हैण् इस परियोजना के जरिए मऊ जनपद के 800 से अधिक किसानों को इन् पद्धितियों से प्रदर्शन द्वारा जानकारी दी जा चुकी है। ब्यूरो के निदेशक डॉ अनिल कुमार सक्सेना के निर्देशन में ब्यूरो दुवारा विक्सित सूक्ष्म जीव आधारित तकनीकों एवं उत्पादों को इस परियोजना में किसानों को न केवल प्रसारित एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है बल्कि चयनित गाँव के कतिपय उन्नत एवं प्रगतिशील किसानों के खेतों पर प्रायोगिक रूप से सूक्ष्मजीव शोधित बीजों की बुवाई से लेकर कटाई तक की निगरानी की जा रही है। इसके द्वारा किसानों के खेतों से ही पौधों और और मिट्टी से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करके सूक्ष्मजीव और इन पद्धतियों के बारम्बार उपयोग से फसलों पर पड़ने वाले लाभकारी प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने बताया की हम न केवल इन पद्धतियों के तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं को किसानो के बीच में प्रसारित कर रहे हैं बल्कि इन तकनीकियों को बारीकी से उनके सामने सजीव रूप से करते हुए प्रदर्शित भी कर रहे हैंण् पिछले वर्ष इन्ही सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जनपद ही नहीं वरन आसपास के जनपदों के कई किसानों ने रासायनिक खादों के उपयोग में 25 से 30 प्रतिशत की कटौती करने में सफलता प्राप्त की है।
ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना के सह अन्वेषक डॉ पवन कुमार शर्मा के अनुसार मिट्टी के साथ ही साथ पीने के पानी का प्रदूषण भी इन रसायनों के उपयोग की एक बड़ी देन है जो अब समस्या के रूप में सामने आ रहा हैण् डॉ. शर्मा के अनुसार इन समस्याओं के समूल निराकरण के रूप में सूक्ष्मजीवए गुणवत्तायुक्त कम्पोस्ट और पौध.आधारित प्राकृतिक तत्व अनुकल्पों के रूप में अब किसानों के सामने कई विकल्प उपलब्ध हैंण् इन विकल्पों को चिन्हित करने, अपनाने और खेती की पद्धतियों में इन उत्पादों को स्थान देने की जिसके माध्यम से कृषि रसायनों से काफी हद तक छुटकारा मिल सकेगा और साथ ही जैविक कृषि की ओर कदम बढाया जा सके। साथ ही उन्होनें जैव नियंत्रकों के उपयोगों के बारे में किसानो को जानकारी दी और किसानों के खेतों में लगने वाले कई रोगों के निदान बताये।
वैज्ञानिक डॉ आदर्श सूक्ष्मजीव आधारित विभिन्न अनुकल्पों के बारे में विस्तार से बताया और प्रतिभागी किसानों के समक्ष बीजए जड़ और मृदा शोधन के प्रयोगों को प्रदर्शित करने के साथ ही खेतों में उगे आलू और गेंहूं की फसलों पर इन जीवों के जलीय अनुकल्पों का छिड़काव भी किया और साथ ही मिट्टी में इन जीवों से संपोषित कम्पोस्ट का भी प्रयोग भी करके दिखाया। किसानों को विभिन्न प्रकार के अनुकल्पए तकनीकी पुस्तिका आदि प्रदान की गयी है जिसके माध्यम से सूक्ष्मजीवों के उपयोगी पहलुओं को समझा जा सके।
इस मौके पर एकत्रित किसानों को भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वछता के विभिन पहलुओं के बारे में डॉ पवन कुमार शर्मा ने विस्तार से बताया और ब्व्टप्क् 19 से बचाव के लिए सावधानियों की जानकारी दी। कोविड 19 से बचाव के लिए को मास्क अवं सैनिटिज़ेर भी वितरित किये गए। इस मौके पर ग्राम प्रधान श्रीमती शीतला, प्रगतिशील किसान पंकज राय और कई उन्नतशील किसानों ने भी भाग लिया। ब्यूरो में कार्यरत कई अनुसन्धान करता एवं तकनीकी सहायक जैसे डॉ सुधीर यादव, पूजा यादव, गरिमा राय, अमित, अजित पाण्डेय, राजन सिंहए आस्था तिवारीए आशुतोष राय ए रामअवधए रबिन्द्र, हरिओम ने कार्यक्रम को आयोजित करने में सहयोग दिया।




